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5 देश, 6 दिन और कई बड़े समझौते; PM मोदी की इस विदेश यात्रा में भारत के लिए क्या है खास?

PM Narendra Modi: पीएम मोदी 2014 के बाद से अब तक यूएई की सात बार यात्रा कर चुके हैं और शेख मोहम्मद ने भारत की पांच बार यात्रा की है। उनकी आखिरी यात्रा जनवरी 2026 में हुई थी।

  • Written By: मनोज आर्या
Updated On: May 12, 2026 | 11:12 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, (सोर्स- सोशल मीडिया)

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PM Narendra Modi 5 Countries Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्‍य भारत को अपनी साझेदारियों को ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा और नई तकनीक जैसे क्षेत्रों में लगातार मजबूत करना है। पीएम 15 मई को अपनी यात्रा की शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात से करेंगे। वहां वह यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे।

पीएम मोदी 2014 के बाद से अब तक यूएई की सात बार यात्रा कर चुके हैं और शेख मोहम्मद ने भारत की पांच बार यात्रा की है। उनकी आखिरी यात्रा जनवरी 2026 में हुई थी, जिसमें वे अगली पीढ़ी के नेताओं के साथ आए थे। यह दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को दिखाता है, जो समय के साथ और भी मजबूत हुए हैं।

एनर्जी सुरक्षा के लिए यूएई बेहद अहम

मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच भी यूएई भारत का सबसे भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बना हुआ है और आगे भी बना रहेगा। दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों की वजह से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत हुई है। इस यात्रा में ऊर्जा सहयोग को और बढ़ाने पर खास ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार पहली बार 100 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गया है और वित्त वर्ष 2025-26 में यह 101.25 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

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शेख मोहम्मद के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, (सोर्स- सोशल मीडिया)

जनवरी 2026 में शेख मोहम्मद की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा था। यूएई भारत का 7वां सबसे बड़ा निवेशक है, और अब तक कुल 25.19 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया है।

भारतीय प्रवासी समुदाय का कल्याण

यूएई में रहने वाले भारतीय प्रवासी वहां का सबसे बड़ा विदेशी समुदाय हैं। वे यूएई की अर्थव्यवस्था और समाज की रीढ़ हैं। उनका कल्याण दोनों देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद यह प्रवासी समुदाय भारत के लिए लगातार रेमिटेंस भेजता रहता है, जिससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को भी फायदा होता है।

रणनीतिक और भू-राजनीतिक संदर्भ

यूएई के बाद प्रधानमंत्री नीदरलैंड जाएंगे। 2017 के बाद यह प्रधानमंत्री की नीदरलैंड्स की दूसरी यात्रा है। यह यात्रा भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एमटीए) के बाद के माहौल में हो रही है। आज नीदरलैंड्स भारत को सिर्फ एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक बड़ी शक्ति के रूप में देखता है। नीदरलैंड्स का उन्नत तकनीकी इकोसिस्टम और भारत की बड़े पैमाने पर उसे लागू करने की क्षमता मिलकर एक ऐसा साझेदारी मॉडल बनाते हैं जिसे ‘नवाचार और बड़े पैमाने पर उपयोग’ कहा जा सकता है। यह खास तौर पर सेमीकंडक्टर, पानी प्रबंधन, हाइड्रोजन और समुद्री तकनीक जैसे क्षेत्रों में साफ दिखाई देता है।

व्यापार, निवेश और EU FTA का महत्व

नीदरलैंड्स भारत का दुनिया में 11वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। यूरोप में तीसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और सबसे बड़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच व्यापार 27.8 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। यह भारत का चौथा सबसे बड़ा निवेशक भी है, जहां से कुल 55.6 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया है। वहीं, भारत से नीदरलैंड्स में 28 अरब डॉलर का निवेश हुआ है। दोनों देशों में 300 से ज्यादा कंपनियां काम कर रही हैं। भारत-ईयू एफटीए से इस साझेदारी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

इस यात्रा के दौरान टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एएसएमएल नीदरलैंड के बीच एक समझौता होगा, जिसके तहत गुजरात के धोलेरा में बनने वाली सेमीकंडक्टर फैक्ट्री को जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रधानमंत्री और नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री मिलकर अफस्लुइटडाइक बांध का दौरा करेंगे। यह भारत-नीदरलैंड्स सहयोग का हिस्सा है, जो स्वच्छ ऊर्जा, जल प्रबंधन और टिकाऊ मत्स्य पालन पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।

आवागमन, प्रवासी समुदाय और पर्यटन

दोनों देश लोगों की आवाजाही (माइग्रेशन और मोबिलिटी) को आसान बनाने पर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम 90,000 से ज्यादा भारतीय प्रवासियों और दो लाख से अधिक सुरिनामी हिंदुस्तानी समुदाय तक पहुंचेगा, जो मुख्य भूमि यूरोप में सबसे बड़ा भारतीय मूल का समुदाय है। नीदरलैंड्स से भारत में पर्यटन बढ़ाने की भी काफी संभावना है। नीदरलैंड्स के बाद प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री मोदी आठ साल बाद स्वीडन की यात्रा करेंगे। इससे पहले वे अप्रैल 2018 में स्वीडन गए थे, जब पहली भारत-नॉर्डिक शिखर बैठक हुई थी।

रणनीतिक और भू-राजनीतिक संदर्भ

स्वीडन अपने जीडीपी का तीन प्रत‍िशत से ज्यादा रिसर्च और डेवलपमेंट (आरएंडडी) पर खर्च करता है और यूरोपीय इनोवेशन स्कोरबोर्ड में लगातार टॉप देशों में रहता है। स्वीडन ने चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में यूरोप में कड़े कदम उठाए हैं, जैसे टेलीकॉम नेटवर्क से चीनी कंपनियों को हटाना और रिसर्च सुरक्षा नियमों को मजबूत करना। इसी वजह से आज स्वीडन भारत को सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि एक बड़ी और अहम वैश्विक शक्ति के रूप में देखता है।

मेक इन इंडिया और ईयू एफटीए का महत्व

2025 में दोनों देशों के बीच वस्तु और सेवा व्यापार 7.75 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। भारत में 280 से ज्यादा स्वीडिश कंपनियां काम कर रही हैं। इस यात्रा का एक अहम हिस्सा यूरोपीय राउंड टेबल ऑफ इंडस्ट्रीज के साथ बैठक भी है, जिससे यूरोप के बड़े उद्योगों के साथ भारत की साझेदारी और मजबूत होगी, खासकर भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के बाद।

स्वीडन की कंपनी ‘साब’ हरियाणा के झज्जर में भारत के बाहर अपनी पहली कार्ल-गुस्ताफ हथियार निर्माण फैक्ट्री बना रही है। यह भारत का पहला ऐसा रक्षा प्रोजेक्ट है, जिसमें 100 प्रत‍िशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) शामिल है। साथ ही स्वीडन यूरोप के बड़े क्रिटिकल मिनरल भंडार वाले देशों में से एक है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सप्लाई चेन मजबूत करने में भारत-स्वीडन सहयोग और अहम हो जाता है।

टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर खास जोर

भारत और स्वीडन के बीच ‘स्वीडन-इंडिया टेक्नोलॉजी’ और एआई कॉर‍िडोर’ के लिए एक समझौता हुआ है, जिसमें 6जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, जीवन विज्ञान और डिजिटल इंडिया जैसी प्राथमिकताओं पर काम होगा। एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में 80 से ज्यादा स्वीडिश कंपनियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा लीड आईटी 3.0, जिसे भारत और स्वीडन ने मिलकर शुरू किया है, अब 18 देशों के 50 सदस्यों तक पहुंच चुका है। मार्च 2025 में महाराष्ट्र और कैन्डेला के बीच हुए समझौते से स्वीडिश इलेक्ट्रिक बोट्स में 1,990 करोड़ रुपए का निवेश हुआ है।

नॉर्वे का ऐत‍िहास‍िक दौरा करेंगे मोदी

स्वीडन की यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे का ऐत‍िहास‍िक दौरा करेंगे। ऐसा इसल‍िए क्‍योंक‍ि 43 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री की पहली अलग द्विपक्षीय यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी की ओस्लो यात्रा ऐतिहासिक है, क्योंकि पिछले 43 वर्षों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने नॉर्वे की अलग से द्विपक्षीय यात्रा नहीं की थी। इस यात्रा में तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन भी होगा, जो स्टॉकहोम 2018 और कोपेनहेगन 2022 के बाद हो रहा है। इससे भारत और नॉर्डिक देशों के रिश्ते और गहरे होंगे, जो अब सिर्फ अमेरिका जैसे बड़े साझेदारों के स्तर तक पहुंच रहे हैं।

19-21 मई को पीएम का इटली दौरा

नॉर्वे से न‍िकलने के बाद प्रधानमंत्री मोदी इटली पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री मोदी 19-21 मई 2026 को इटली का दौरा करेंगे, जहां वे प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर जाएंगे। यह यात्रा दोनों नेताओं के बीच लगातार बढ़ती बातचीत के बाद हो रही है। इस साझेदारी को 2025-29 की संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना (जॉइंट स्ट्रेटेजिक प्लान ऑफ एक्शन) के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है, जो दोनों देशों के सहयोग का रोडमैप है।

इटली के प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ पीएम मोदी, (सोर्स- सोशल मीडिया)

ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत सप्लाई चेन

इटली अब भारत को सिर्फ एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक बड़ी वैश्विक शक्ति और यूरोप के लिए एक जरूरी साझेदार के रूप में देखता है। इटली आईएमईईसी (भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा) का संस्थापक सदस्य है और स्पार्कल-एयरटेल ब्लू-रामन सबमरीन केबल के जरिए जेनोआ तक कनेक्टिविटी भी शुरू हो चुकी है। इससे इटली इस कॉरिडोर का पश्चिमी अहम हिस्सा बन गया है। आईएमईईसी से सप्लाई चेन ज्यादा स्थिर होगी और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

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व्यापार, निवेश और ईयू एफटीए का महत्व

इटली में भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 2025 में दोनों देशों के बीच व्यापार 16.77 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, और 2029 तक इसे 20 अरब यूरो तक ले जाने का लक्ष्य है। टाटा मोटर्स की ओर से इवेको ग्रुप का 3.8 अरब यूरो में अधिग्रहण अब तक का भारत का इटली में सबसे बड़ा निवेश है।

एजेंसी इनपुट के साथ- 

Pm narendra modi five countries visit why it is special for india

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Published On: May 12, 2026 | 11:11 PM

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