यूएई ने बंद की छात्रवृत्ति, सांकेतिक एआई फोटो
Muslim Brotherhood Influence UK Universities: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक कड़ा कदम उठाते हुए ब्रिटेन की यूनिवर्सिटीज में पढ़ने वाले अपने छात्रों की सरकारी सहायता पर रोक लगा दी है। यूएई की एक आंतरिक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ब्रिटिश कैंपस कट्टरपंथ और ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ की विचारधारा के केंद्र बनते जा रहे हैं, जिससे युवाओं के गुमराह होने का खतरा बढ़ गया है।
UAE प्रशासन का मानना है कि ब्रिटेन की कुछ यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई के नाम पर छात्रों का वैचारिक ब्रेनवॉश किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इन शिक्षण संस्थानों में ऐसे छात्र संगठनों का प्रभाव बढ़ रहा है जो कट्टरपंथी वक्ताओं को आमंत्रित करते हैं। यूएई को डर है कि इन वक्ताओं की चरमपंथी सोच अमीराती युवाओं को प्रभावित कर सकती है, जो भविष्य में देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
यूएई सरकार के लिए मुस्लिम ब्रदरहुड एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है। अमीरात ने इस संगठन को पहले ही आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। सरकार का मानना है कि यह संगठन न केवल यूएई बल्कि पूरे क्षेत्र के राजनीतिक और सामाजिक ढांचे के लिए सीधा खतरा है।
आंतरिक रिपोर्टों में खुलासा हुआ है कि ब्रिटेन की यूनिवर्सिटीज में इस संगठन का प्रभाव तेजी से फैल रहा है, जिसे रोकने के लिए यूएई ने अब फंडिग की सप्लाई लाइन काटने का फैसला किया है। यूएई लंबे समय से यूरोपीय देशों से भी इस संगठन के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग करता रहा है।
यूएई सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। जिन परिवारों के पास निजी संसाधन हैं, वे अपने बच्चों को अपने खर्च पर ब्रिटेन भेज सकते हैं। हालांकि, अब सरकार की ओर से मिलने वाली ट्यूशन फीस, रहने का खर्च, यात्रा भत्ता और हेल्थ इंश्योरेंस जैसी भारी-भरकम सुविधाएं ब्रिटेन जाने वाले छात्रों को नहीं मिलेंगी।
यह भी पढ़ें:- ईरान में ‘इस्लामिक शासन’ के खिलाफ महासंग्राम; धीरे-धीरे 27 प्रांतों में फैली आग, बैकफुट पर शासन
हैरानी की बात यह है कि यूएई की यह सख्ती सिर्फ ब्रिटेन तक ही सीमित है। जो छात्र अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप के अन्य देशों या एशिया के बड़े संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें पहले की तरह सरकारी सहायता मिलती रहेगी। आमतौर पर यूएई अपने प्रतिभाशाली छात्रों को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में पढ़ने के लिए पूरा खर्च उठाता है, लेकिन कट्टरपंथ के बढ़ते खतरे ने ब्रिटेन को इस विशेषाधिकार वाली सूची से बाहर कर दिया है।