अमेरिका-ईरान तनाव (सोर्स- सोशल मीडिया)
Large Scale US Military Deployment: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति काफी गंभीर होती जा रही है। खाड़ी क्षेत्र में एफ-22 और एफ-35 विमानों के साथ दो-दो एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए गए हैं। बड़े पैमाने पर अमेरिकी सैन्य तैनाती के बावजूद अमेरिकी जनरल डैन केन सैन्य जटिलताओं और सैनिकों की सुरक्षा को लेकर काफी परेशान हैं। वे राष्ट्रपति ट्रंप के साथ संतुलन बिठाते हुए संभावित युद्ध के हर खतरे का गहराई से आकलन कर रहे हैं।
अमेरिका ने ईरान को घेरने के लिए इजराइल और जॉर्डन के रास्तों का सहारा लिया है। उसने पहली बार इजराइल में 12 शक्तिशाली एफ-22 लड़ाकू विमानों की सफल लैंडिंग कराई है। इस तैनाती का मुख्य उद्देश्य संभावित ईरानी जवाबी हमलों से क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ईरान पर हमले को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने सेना और वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ इस विषय पर कई महत्वपूर्ण बैठकें की हैं। उन्हें डर है कि बड़े हमले की स्थिति में अमेरिकी सैनिकों को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप के सलाहकार चाहते हैं कि इजराइल ईरान पर पहला हमला करे। अगर इजराइल हमला करता है तो ईरान की जवाबी कार्रवाई से अमेरिका को युद्ध का आधार मिलेगा। इससे अमेरिकी जनता के बीच ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए भारी जनसमर्थन भी मिल सकेगा।
मध्य पूर्व में अमेरिका ने इराक युद्ध के बाद से अब तक का सबसे बड़ा जमावड़ा किया है। एयरक्राफ्ट कैरियर और उन्नत लड़ाकू विमानों की मौजूदगी से युद्ध की आशंका बहुत बढ़ गई है। हालांकि दोनों देश जिनेवा में परमाणु वार्ता को दोबारा शुरू करने की तैयारी भी कर रहे हैं।
एक सूत्र ने चेतावनी दी है कि ईरान को हल्के में लेना अमेरिका के लिए भारी पड़ सकता है। अगर सत्ता परिवर्तन जैसा हमला हुआ तो ईरान अपनी पूरी सैन्य ताकत के साथ जवाब देगा। अमेरिका के कई ठिकाने इजराइल के आयरन डोम जैसे सुरक्षा कवच से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।
पॉलिटिको की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस युद्ध से चीन को मौका मिल सकता है। अगर युद्ध के कारण अमेरिका के हथियारों का भंडार कम होता है तो चीन ताइवान पर हमला कर सकता है। यह स्थिति अमेरिका के लिए वैश्विक स्तर पर एक नई और बड़ी सुरक्षा चुनौती पैदा कर देगी।
युद्ध की आशंकाओं के बीच अमेरिकी सांसदों ने ईरान के खिलाफ एक नया मानवाधिकार विधेयक पेश किया है। इसका उद्देश्य ईरान में इंटरनेट की स्वतंत्रता को बढ़ाना और मानवाधिकार उल्लंघन करने वालों पर सख्ती करना है। फिलहाल कोई अंतिम सैन्य निर्णय नहीं लिया गया है और स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है।
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अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई कितनी बड़ी होगी इस पर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टता नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे युद्ध की स्थिति में गोला-बारूद की भारी कमी हो सकती है। ऐसी स्थिति में अमेरिका को अपनी अन्य वैश्विक सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को निभाने में मुश्किल आएगी।
सूत्रों का यह भी कहना है कि अमेरिका और इजराइल मिलकर संयुक्त सैन्य अभियान चला सकते हैं। चाहे इजराइल पहले हमला करे या नहीं, दोनों देशों की सेनाएं समन्वय के साथ काम करेंगी। खाड़ी क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है और दुनिया की नजरें अगले कदम पर हैं।