राष्ट्रपति ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Donald Trump Supreme Court Visit: अमेरिका के राजनीतिक और न्यायिक इतिहास में बुधवार को एक अभूतपूर्व घटना घटी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सुबह 10 बजे (अमेरिकी समयानुसार) वॉशिंगटन स्थित सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। वे वहां किसी समारोह के लिए नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण मामले में वकीलों की मौखिक दलीलें सुनने के लिए गए थे। इसके साथ ही ट्रंप अमेरिका के पहले ऐसे ‘हेड ऑफ द स्टेट’ बन गए हैं जिन्होंने पद पर रहते हुए अदालत कक्ष में बैठकर सुनवाई में शिरकत की है।
राष्ट्रपति Trump सुप्रीम कोर्ट में आम जनता के लिए निर्धारित क्षेत्र की पहली कतार में बैठे नजर आए। हालांकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही जनता के लिए खुली रहती है लेकिन एक मौजूदा राष्ट्रपति की वहां उपस्थिति को लेकर बहस छिड़ गई है। कई कानूनी संगठनों और विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति का इस तरह अदालत पहुंचना न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। गौरतलब है कि अमेरिकी संविधान में सुप्रीम कोर्ट को व्हाइट हाउस की शक्तियों पर एक स्वतंत्र नियंत्रण के तौर पर डिजाइन किया गया है।
ट्रंप जिस केस की सुनवाई सुनने पहुंचे थे वह ‘बारबरा बनाम ट्रंप’ के नाम से जाना जाता है। यह मामला अमेरिका में जन्मजात नागरिकता के अधिकार से जुड़ा है। ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे जिसका उद्देश्य उन बच्चों को अमेरिका की नागरिकता देने से रोकना था जिनके माता-पिता देश में अवैध रूप से या अस्थायी तौर पर रह रहे हैं।
यह आदेश फिलहाल लागू नहीं हो पाया है क्योंकि कई निचली अदालतों ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए इस पर रोक लगा दी थी। अब यह मामला देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के पास है। अमेरिका में 1868 के 14वें संशोधन के बाद से यह कानून है कि वहां जन्म लेने वाला कोई भी व्यक्ति स्वतः नागरिक बन जाता है लेकिन ट्रंप प्रशासन इसे शर्तों के साथ लागू करना चाहता है।
ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने खुद वहां जाने की योजना इसलिए बनाई क्योंकि वे लंबे समय से इस केस के बारे में सुनते आ रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप की नीतियां सुप्रीम कोर्ट की कसौटी पर कसी जा रही हैं। अकेले 2025 में ही अदालत ने उनके प्रशासन से जुड़े लगभग दो दर्जन आपातकालीन मामलों पर विचार किया था।
हालांकि अधिकांश फैसलों में अदालत ने ट्रंप का साथ दिया लेकिन ‘टैरिफ’ लगाने के मुद्दे पर कोर्ट ने उनके खिलाफ फैसला सुनाते हुए उनके अधिकारों को गलत माना था।
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इतिहास पर नजर डालें तो कम से कम आठ अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने अपने वकील के करियर के दौरान सुप्रीम कोर्ट में बहस की है लेकिन किसी भी पदस्थ राष्ट्रपति ने केवल सुनवाई सुनने के लिए व्हाइट हाउस से अदालत तक का सफर तय नहीं किया था।