सऊदी अरब को F-35 जेट देंगे ट्रंप, इस खबर से इजरायल और भारत की बढ़ी टेंशन
Israel India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब को F-35 लड़ाकू विमान बेचने की मंजूरी दे दी, जिससे इजरायल और भारत दोनों की सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (सोर्स - सोशल मीडिया)
Trump to Sell F-35 Jets to Saudi Arabia: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बड़े ऐलान ने पूरे मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में नई हलचल पैदा कर दी है। सऊदी अरब को F-35 जैसे अत्याधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट मिलने का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है। इस फैसले से सबसे ज्यादा चिंता इजरायल और भारत को हो रही है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदल सकता है। रक्षा विशेषज्ञ इसे आने वाले समय में नई हथियार दौड़ की शुरुआत भी मान रहे हैं।
सऊदी को F-35 बेचेंगे ट्रंप, इजरायल और भारत क्यों हुए चिंतित?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब को F-35 लड़ाकू विमान बेचने की मंजूरी देने का ऐलान किया। यह घोषणा उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की व्हाइट हाउस यात्रा से एक दिन पहले की। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “हम ऐसा करेंगे, हम F-35 बेचेंगे।” यह बयान तब आया है जब पेंटागन के खुफिया अधिकारियों और कई क्षेत्रीय सहयोगियों ने इस डील पर गंभीर जोखिमों की चेतावनी दी थी।
इजरायल का सीधा विरोध, QME को खतरा
17 नवंबर को इजरायली रक्षा बल (IDF) ने अपने नेतृत्व को एक औपचारिक दस्तावेज सौंपा जिसमें F-35 बिक्री पर कड़ा विरोध जताया गया। इजरायल का कहना है कि सऊदी को ये विमान मिलने से उसकी गुणात्मक सैन्य बढ़त (Qualitative Military Edge-QME) कमजोर हो जाएगी। IDF ने चेताया कि, इजरायल का हवाई वर्चस्व F-35 जैसे 5th-Gen स्टेल्थ जेट्स पर निर्भर है, लंबे दूरी वाले गुप्त अभियानों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा, उत्पादन दबाव बढ़ने से इजरायल को मिलने वाले नए F-35 स्क्वाड्रन में देरी हो सकती है, अमेरिकी कानून इजरायल की सैन्य बढ़त को सुरक्षित करने की गारंटी देता है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने यह साफ नहीं किया कि इजरायल को इसके बदले कोई अतिरिक्त क्षमता दी जाएगी या नहीं।
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DIA की चेतावनी, चीन तक पहुंच सकती है F-35 टेक्नोलॉजी
रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) की एक गोपनीय रिपोर्ट ने बड़ा खतरा बताया है यदि सौदा पूरा हुआ, तो चीन को F-35 तकनीक मिल सकती है। इसके पीछे कारण है-
- सऊदी और चीन के बीच मजबूत रक्षा और व्यापारिक संबंध
- दोनों देशों के बीच संयुक्त नौसैनिक अभ्यास
- चीन सऊदी का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
- विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीकी लीक का खतरा बहुत अधिक है।
भारत भी हुआ सतर्क, पाकिस्तान के जरिए खतरा
भारत ने भी इस डील पर चिंता जताई है। कारण है- सऊदी अरब और पाकिस्तान का हालिया रक्षा समझौता, जिसमें कहा गया है कि एक देश पर हमला, दूसरे पर हमला माना जाएगा। भारत के रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि, सऊदी के रास्ते पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी तकनीक मिल सकती है, F-35 से सऊदी की हवाई ताकत कई गुना बढ़ जाएगी, भारत सहित पड़ोसी देशों को अपनी मिसाइल और वायु रक्षा रणनीति फिर से बनानी पड़ेगी, इससे क्षेत्र में हथियारों की नई दौड़ शुरू हो सकती है।
सऊदी का बड़ा ऑर्डर- 48 F-35 खरीदने का प्लान
सऊदी अरब ने लॉकहीड मार्टिन से 48 F-35 खरीदने का औपचारिक अनुरोध किया है। यदि सौदा मंजूर होता है, तो सऊदी पहली अरब वायुसेना बन जाएगी जिसके पास 5th-Gen स्टेल्थ फाइटर जेट होंगे। फिलहाल मध्य पूर्व में सिर्फ इजरायल ही F-35 संचालित करता है।
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एक F-35 की कीमत करीब 10 करोड़ डॉलर मानी जाती है। इजरायल लगातार वाशिंगटन और रियाद के बीच ऐसे किसी भी समझौते का विरोध करता रहा है, क्योंकि अमेरिकी कानून में उसकी सैन्य बढ़त को सुरक्षित रखने का प्रावधान है।
