...तो F-35 का निशाना बनेगा भारत? सऊदी डील के बाद पाकिस्तान की बढ़ी उम्मीदें, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Saudi-US F-35 Fighter Jet Deal: अमेरिका-सऊदी F-35 डील से क्षेत्रीय संतुलन बदल सकता है। पाकिस्तान-सऊदी डिफेंस समझौते के कारण यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह लड़ाकू विमान पाकिस्तान तक पहुंच सकते हैं?
will the F-35 target India? Pakistan's hopes rise after the Saudi deal, read the full report.
सऊदी-US डील के बाद पाकिस्तान की बढ़ी उम्मीदें, (डिजाइन फोटो)
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Saudi- US Defence Deal: अमेरिका और सऊदी अरब के बीच संभावित F-35 फाइटर जेट डील ने क्षेत्रीय भू-राजनीति को नए सिरे से हिलाकर रख दिया है। अब तक सैन्य विस्तार में अपेक्षाकृत संयम बरतने वाला सऊदी अरब अचानक दुनिया के सबसे उन्नत 5th जेनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट में रुचि दिखा रहा है। यह वही विमान है जो रडार पर लगभग न के बराबर दिखाई देता है और जिसकी एवियोनिक्स एवं मारक क्षमता दुनिया में सबसे अधिक मानी जाती है।

अमेरिका F-35 को अत्यंत नियंत्रित शर्तों पर निर्यात करता है और केवल भरोसेमंद साझेदारों को ही इसकी अनुमति देता है। ऐसे में सऊदी को यह विमान मिलने का मतलब है कि उसके एयर डिफेंस में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होगी। लेकिन यही कदम भारत के लिए चिंता का कारण भी बन सकता है क्योंकि हाल ही में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुई डिफेंस डील ने कई नए सवाल खड़े किए हैं।

पाकिस्तान-सऊदी समझौता

इस द्विपक्षीय समझौते के अनुसार, पाकिस्तान पर हुआ हमला सऊदी पर हमला माना जाएगा और सऊदी पर हमला पाकिस्तान पर हमला माना जाएगा। यह एक तरह का सुरक्षा आश्वासन है, जिसके चलते विशेषज्ञों का अनुमान है कि क्या भविष्य में सऊदी के हथियार या तकनीक पाकिस्तान तक पहुंच सकते हैं?

क्या सऊदी पाक को देगा F-35?

अब सबके मन में ये सवाल आ रहा है कि यदि सऊदी के पास F-35 आते हैं तो क्या वह पाकिस्तान के साथ उन्हें साझा करेगा? अमेरिका ऐसी किसी भी तकनीक के ट्रांसफर पर बेहद सख्त नियंत्रण रखता है। F-35 के निर्यात में सुरक्षा प्रोटोकॉल, लॉजिस्टिक्स, ट्रेनिंग और ‘एंड-यूज मॉनिटरिंग’ शामिल होती है, जिसे बिना अनुमति तोड़ा नहीं जा सकता। कोई भी अनधिकृत ट्रांसफर अमेरिका-सऊदी संबंधों पर भारी राजनीतिक असर डाल सकता है।

भारत के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण

दूसरी तरफ, पाकिस्तान आर्थिक रूप से F-35 को खरीदने या मेंटेन करने की क्षमता नहीं रखता। ऐसे में उसके लिए इस जेट को सीधे हासिल करना लगभग असंभव है। लेकिन विशेषज्ञों को चिंता है कि यदि किसी भी रूप में साझा ऑपरेशनल सपोर्ट, डिप्लॉयमेंट या इंटेलिजेंस लिंकिंग की व्यवस्था बनी तो भारत के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

हालांकि पूर्व की स्थिति देखें तो 1980-88 ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी पाकिस्तान ने सऊदी की सुरक्षा के लिए राजनीतिक आश्वासन दिया था, पर कभी वास्तविक सैन्य हस्तक्षेप नहीं किया। भारत और पाकिस्तान के तनाव के समय भी सऊदी ने पाकिस्तान का आर्थिक समर्थन किया, लेकिन भारत के खिलाफ अपनी सेना का उपयोग नहीं किया।

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