अमेरिकी विशेषज्ञ ने खोल राजे, कहा- सीजफायर का क्रेडिट नही मिला, नाराज थे ट्रंप, इसलिए लगाया टैरिफ
Tariff Controversy: अमेरिकी विशेषज्ञ टेलिस के अनुसार, ट्रंप भारत-पाक संकट में मान्यता न मिलने से नाराज हैं; मोदी के हस्तक्षेप अनुरोध ने स्थिति और जटिल की। अमेरिका ने भारत पर टैरिफ और दबाव बढ़ाया।
- Written By: अक्षय साहू
डोनाल्ड ट्रंप (फोटो- सोशल मीडिया )
Trump Tariff: अमेरिकी सामरिक मामलों के विशेषज्ञ एश्ले जे. टेलिस ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को “ठगा हुआ” महसूस कर रहे हैं क्योंकि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान विवाद के समाधान में उनकी भूमिका को भारत की ओर से मान्यता नहीं मिली। टेलिस के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ट्रंप से हस्तक्षेप करने का अनुरोध करना, बजाय स्थिति को सुधारने के, उल्टा मामला और जटिल बना गया।
टेलिस ने कहा, “मुझे लगता है कि ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि उन्हें भारत-पाकिस्तान संकट समाधान में श्रेय नहीं मिला, जिसकी वे उम्मीद कर रहे थे। मोदी के आह्वान ने स्थिति को सुधारने की बजाय और जटिल बना दिया।”
भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ा
हाल के हफ्तों में ट्रंप प्रशासन ने भारत पर रूसी तेल की खरीद पर अतिरिक्त शुल्क लगाए और भारत की शांति स्थापना की भूमिका को नकारा, जिससे भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ गया। अमेरिकी टैरिफ अब भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जो ब्राजील के बाद सबसे ज्यादा है।
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एश्ले जे. टेलिस के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप भारत के उस “मौलिक असंतोष” से नाराज़ हैं, जिसमें भारत का मानना है कि अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने में कोई प्रभावशाली भूमिका नहीं निभाई। इस असंतोष को देखते हुए ट्रंप अब भारत को निशाना बना रहे हैं।
टेलिस का मानना है कि ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने भारत-अमेरिका संबंधों को और अधिक नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने कहा, “नवारो की नीतियों के चलते भारत को अब कुछ ऐसे देशों के साथ साझेदारी करनी पड़ रही है, जो अमेरिका के विरोधी माने जाते हैं, क्योंकि भारत के पास विकल्प सीमित होते जा रहे हैं।”
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नवारो ने भारत पर लगाए गंभीर आरोप
अमेरिका का तर्क है कि भारत का रूस से कच्चा तेल खरीदना पुतिन के यूक्रेन युद्ध को वित्तीय मदद दे रहा है। ट्रंप ने पिछले साल दावा किया था कि वे इस युद्ध को कुछ ही घंटों में खत्म कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नवारो ने भारत को “टैरिफ का महाराज” कहा और आरोप लगाया कि भारत रूसी तेल के आयात को लेकर “मुनाफाखोरी की योजना” चला रहा है, जो क्रेमलिन के लिए लॉन्ड्रोमैट की तरह काम कर रही है।
