ईरान जंग में फंसे ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US Iran War News: ईरान पर हमले के महज 10 दिन बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर बदलते नजर आ रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार (10 मार्च) को संकेत दिया है कि वह जल्द ही युद्ध खत्म करने के पक्ष में हैं और अब सुलह का रास्ता तलाश रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के करीब सलाहकारों ने उन्हें आगाह किया है कि इस जंग को लंबा खींचने से अमेरिका को फायदे के बजाय भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ट्रंप के सलाहकारों का मानना है कि इस युद्ध से अमेरिका को कोई बड़ा आर्थिक या सैन्य लाभ हासिल नहीं हो रहा है। सबसे बड़ी चिंता घरेलू राजनीति को लेकर है। अमेरिका में इसी साल के अंत में मिडटर्म इलेक्शन होने हैं और सलाहकारों को डर है कि युद्ध के कारण ट्रंप के कोर वोटर उनसे नाराज हो सकते हैं, जो चुनाव परिणामों के लिए घातक साबित होगा।
वहीं, क्विनिपियाक यूनिवर्सिटी के एक नए सर्वे के अनुसार, 53 प्रतिशत अमेरिकी नागरिक ईरान के खिलाफ इस सैन्य हमले का विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा, 44 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अमेरिका इजरायल का जरूरत से ज्यादा समर्थन कर रहा है।
जंग की शुरुआत में अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान में तख्तापलट करना था। इसके लिए हमले के दूसरे ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी गई और टॉप-40 कमांडरों को मार गिराया गया। हालांकि, एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया परिषद ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि शीर्ष नेतृत्व के खत्म होने के बावजूद ईरान की जनता सड़कों पर नहीं उतरी और तख्तापलट की उनकी रणनीति विफल रही है। ईरान अभी भी युद्ध में मजबूती से डटा हुआ है।
इस युद्ध ने अमेरिकी खजाने पर भारी बोझ डाल दिया है। आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका ने शुरुआती 2 दिनों में ही 5.6 बिलियन डॉलर का गोला-बारूद इस्तेमाल कर लिया था। अनादोलु एजेंसी के मुताबिक, युद्ध के महज 10 दिनों के भीतर अमेरिका 10 बिलियन डॉलर (लगभग 10 अरब डॉलर) से ज्यादा की रकम स्वाहा कर चुका है।
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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे अमेरिका की विफलता बताया है। अराघची का कहना है कि अमेरिका का यह भ्रम टूट चुका है कि हमला होते ही ईरान में तख्तापलट हो जाएगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका का ‘प्लान-ए’ पूरी तरह फेल हो चुका है और अब वे ‘प्लान-बी’ के जरिए जीतना चाहते हैं, लेकिन उसमें भी उन्हें सफलता नहीं मिलेगी। इन्ही परिस्थितियों के चलते अब अमेरिकी राष्ट्रपति सुलह का रास्ता ढूंढने पर मजबूर हुए हैं।