'बिकने के लिए नहीं है ग्रीनलैंड', ट्रंप की धमकी पर भड़के पीएम नीलसन, बोले- कब्जे का सपना छोड़ो

Trump Greenland Conflict: डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की धमकी के बाद वहां के पीएम जेंस फ्रेडरिक नीलसन ने करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी कब्जे की फैंटेसी बंद करे।
Greenland PM Slams Trump's Takeover Threat: "Our Home Is Not For Sale, Stop Occupation Fantasy"
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ग्रीनलैंड के पीएम जेन्स फ्रेडरिक नीलसन (सोर्स-सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Trump Threatens to Occupy Greenland: वेनेजुएला में सफल सैन्य ऑपरेशन और निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब ग्रीनलैंड को लेकर अपने इरादे साफ कर दिए हैं। ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताते हुए वहां सैन्य हस्तक्षेप और नियंत्रण की बात कही, जिससे वैश्विक राजनीति में नया उबाल आ गया है।

इस बयान पर ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस फ्रेडरिक नीलसन ने कड़ी आपत्ति जताते हुए ट्रंप को अपनी "कब्जे की फैंटेसी" बंद करने की सीधी चेतावनी दी है। नीलसन ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड कोई वस्तु नहीं बल्कि एक संप्रभु राष्ट्र के लोगों का घर है, जिसे किसी भी कीमत पर बेचा या हड़पा नहीं जा सकता।

ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा वाली दलील

डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण होना बेहद जरूरी है। उन्होंने तर्क दिया कि डेनमार्क इस रणनीतिक द्वीप की रक्षा करने में सक्षम नहीं है और अमेरिका को अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए इसे संभालना होगा। ट्रंप की इस विस्तारवादी सोच ने न केवल ग्रीनलैंड बल्कि यूरोप के कई देशों को भी चिंता में डाल दिया है।

पीएम नीलसन का करारा जवाब

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस फ्रेडरिक नीलसन ने ट्रंप के दावों को अंतरराष्ट्रीय कानून का अपमान और वहां के नागरिकों का अनादर करार दिया है। उन्होंने कहा कि कोई भी सोशल मीडिया पोस्ट या धमकी ग्रीनलैंड का भविष्य तय नहीं कर सकती क्योंकि यह देश बिकने के लिए उपलब्ध नहीं है। नीलसन ने जोर देकर कहा कि दो देशों के बीच संबंध आपसी सम्मान पर आधारित होने चाहिए, न कि सैन्य ताकत के डर पर।

डेनमार्क ने भी दिखाई सख्ती

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सेन ने भी इस मुद्दे पर अमेरिका को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अमेरिका के पास डेनिश साम्राज्य के किसी भी हिस्से को हड़पने का अधिकार नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि डेनमार्क नाटो का एक वफादार सदस्य है और अमेरिका के साथ उसके रक्षा समझौते पहले से ही सैन्य सहयोग की अनुमति देते हैं। डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं करेगा।

रणनीतिक महत्व और भविष्य का संकट

ग्रीनलैंड अपनी प्रचुर प्राकृतिक संपदा और आर्कटिक समुद्री रास्तों पर नियंत्रण के कारण अमेरिका, रूस और चीन जैसी महाशक्तियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 1951 के समझौते के तहत अमेरिका पहले से ही वहां सैन्य बेस संचालित कर रहा है, लेकिन ट्रंप अब पूर्ण नियंत्रण की मांग कर रहे हैं। इस विवाद ने अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच दरार पैदा कर दी है, जिससे आने वाले समय में आर्कटिक क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com