Tahawwur Rana पर कनाडा मेहरबान? आतंकी साजिश के आरोपी की नागरिकता छीनने में क्यों अटका है कनाडा? ये है वजह
Tahawwur Rana Citizenship: मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा की कनाडाई नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया 15 साल से लटकी है। कनाडा में धोखाधड़ी से मिली नागरिकता छीनना लंबी व कठिन प्रक्रिया बन चुकी है।
- Written By: प्रिया सिंह
मुंबई हमले का आरोपी तहव्वुर राणा (सोर्स-सोशल मीडिया)
Why Canada Delays Tahawwur Rana Citizenship: मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा की कनाडाई नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया 15 साल से ज्यादा समय से चल रही है। यह मामला कनाडा की नागरिकता व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ा सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है। अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किए जाने के बाद अब उस पर भारत में 26/11 हमले का कड़ा मुकदमा चलेगा। कनाडा में इस बीच लगातार सवाल उठ रहे हैं कि उसकी नागरिकता अब तक क्यों नहीं रद्द हुई।
पिछले कुछ सालों में सामने आए मामलों से पता चलता है कि कनाडा में नागरिकता छीनना बेहद जटिल है। कई बार तो सरकार को इस पूरी कानूनी प्रक्रिया में 10 से 20 साल तक का लंबा समय लग जाता है। राणा पर आरोप है कि उसने साल 2000 में आवेदन करते समय सरकार को अपने पते की गलत जानकारी दी थी। उसने ओटावा में रहने का दावा किया था लेकिन जांच में सामने आया कि वह मुख्य रूप से शिकागो में रहता था।
झूठी नागरिकता का सच
कनाडाई और अमेरिकी जांच में यह सामने आया कि राणा उस समय शिकागो में कई बड़े कारोबार चला रहा था। इसके बावजूद उसे साल 2001 में बिना किसी रुकावट के कनाडाई नागरिकता और असली पासपोर्ट मिल गए। बाद में उसने इसी कनाडाई पासपोर्ट का इस्तेमाल करके मुंबई हमले से पहले भारत की यात्रा की थी।
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कनाडा में एक बार नागरिकता मिलने के बाद उसे छीनना इसलिए काफी मुश्किल है क्योंकि यह अधिकार बन जाती है। अदालतें यह सुनिश्चित करती हैं कि हर आरोपी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पूरा कानूनी मौका मिले। नागरिकता रद्द करने के लिए विदेशी रिकॉर्ड जुटाने और अदालती प्रक्रिया पूरी करने में काफी साल लग जाते हैं।
बदलते कनाडाई नियम
साल 2015 में तत्कालीन प्रधानमंत्री की सरकार ने आतंकवाद के मामलों में नागरिकता रद्द करना बहुत आसान बनाया था। लेकिन ट्रूडो सरकार ने इस फैसले को पलट दिया और कहा कि दोहरी नागरिकता वालों से भेदभाव पूरी तरह गलत है। अब 2017-18 के नियमों के तहत केवल धोखाधड़ी या तथ्य छिपाने पर ही देश की नागरिकता छीनी जा सकती है।
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इमिग्रेशन विशेषज्ञों के अनुसार कनाडा के पास ऐसे जटिल मामलों को तेजी से निपटाने के लिए संसाधनों की भारी कमी है। तहव्वुर राणा केस में जांच 2009 में शुरू हुई थी और सरकार ने 2024 में अदालत से अपना अंतिम फैसला मांगा है। राणा ने सालों की देरी का फायदा उठाते हुए अदालत में कहा कि अब उसे अपनी पुरानी घटनाएं याद ही नहीं हैं।
