ताइवान पर संकट के बादल! ट्रंप के चीन दौरे से मची हलचल, क्या महाशक्तियों के खेल में मोहरा बनेगा ताइवान?
Trump China Visit: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप 3 दिन की यात्रा पर चीन पहुंच गए हैं। ट्रंप चीन दौरा से ताइवान की धड़कनें तेज हो गई हैं क्योंकि उसे अपनी सुरक्षा और संप्रभुता दांव पर लगने का डर है।
- Written By: प्रिया सिंह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (सोर्स-सोशल मीडिया)
Donald Trump China Visit Taiwan Fears: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तीन दिन की अहम यात्रा पर बुधवार को चीन पहुंच चुके हैं। इस महत्वपूर्ण ट्रंप चीन दौरे पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। लेकिन एक छोटा सा देश ताइवान है जिसका दिल इस यात्रा को लेकर बहुत जोर-जोर से धड़क रहा है। ताइवान अपनी सुरक्षा को लेकर इस समय सबसे ज्यादा चिंतित और परेशान है।
ताइवान पर चीन की काफी लंबे अरसे से पैनी नजर बनी हुई है और वह इसे अपना हिस्सा मानता है। ताइवान को अब यह डर सता रहा है कि ट्रंप चीन दौरा के दौरान कोई बड़ा समझौता न हो जाए। वह सोच रहे हैं कि चीन से कोई ऐसा समझौता न हो जो उनकी सुरक्षा और संप्रभुता को दांव पर लगा दे। यह ट्रंप की 9 साल में दूसरी चीन यात्रा है जहां सातवीं बार शी जिनपिंग से उनकी मुलाकात होगी।
व्यापार है सबसे बड़ा मुद्दा
ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच आमने-सामने की यह अहम बातचीत होने जा रही है। इस यात्रा का मुख्य मकसद व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना और टैरिफ का तनाव खत्म करना है। हालांकि पर्दे के पीछे ताइवान सहित कई और भी अहम मुद्दे इस चर्चा का बहुत बड़ा हिस्सा हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग लंबे समय से ताइवान को अपना बनाने का सपना देखते आए हैं। चीन साफ कह चुका है कि ताइवान को उसका हिस्सा बनने से कोई नहीं रोक सकता है। इसके लिए चीन ने जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई करने की भी पूरी धमकी दे रखी है।
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अमेरिका और ताइवान
अमेरिका के ताइवान से काफी गहरे संबंध हैं और उसकी सुरक्षा इसी बात पर टिकी है। ताइवान के विपक्षी नेताओं को डर है कि चीन बातचीत के दौरान ताइवान को सौदेबाजी का हथियार बनाएगा। अगर ट्रंप ने ईरान युद्ध खत्म कराने के लिए मदद मांगी तो चीन ताइवान पर दबाव डालेगा। अमेरिका और ताइवान के बीच पिछले साल 11 बिलियन डॉलर की बड़ी आर्म्स डील हुई थी। इस डील में 82 हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम, 420 आर्मी टेक्टिकल मिसाइल और 60 होवित्जर तोपें हैं।
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चीन ने इस बड़े हथियार सौदे पर अपनी सख्त आपत्ति जताई थी और इसे रुकवाना चाहता है। ताइवान को डर है कि ट्रंप इस हथियार सौदे को ठंडे बस्ते में न डाल दें। अमेरिका ने अभी तक डील के तहत इन हथियारों की सप्लाई भी शुरू नहीं की है। अमेरिकी अधिकारी हालांकि ताइवान नीति में बदलाव से इनकार कर रहे हैं पर ट्रंप का कोई भरोसा नहीं है।
