इंडोनेशिया में यौन अपराध पर शरिया अदालत ने 2 लड़कों को सुनाई अजीब सजा, लोगों ने तालिबान से की तुलना
Indonesia News: इंडोनेशिया के आसेह प्रांत में शरिया अदालत ने दो युवकों को यौन कृत्य का दोषी मानते हुए सार्वजनिक रूप से 80-80 बेंत मारने की सजा सुनाई, जिससे व्यापक आलोचना हो रही है।
- Written By: अक्षय साहू
इंडोनेशियाई शरिया अदालत (फोटो- सोशल मीडिया)
Islamic Shariah Court In Indonesia: इंडोनेशिया से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां रूढ़िवादी आसेह प्रांत में एक इस्लामी शरिया अदालत ने दो युवकों को यौन कृत्य में लिप्त पाए जाने पर सार्वजनिक रूप से 80-80 बेंत मारने की सजा सुनाई है। यह सजा सोमवार को प्रांतीय राजधानी बैंडा आसेह में दी गई। दोनों की उम्र 20 और 21 साल बताई गई है।
यह मामला अप्रैल में तब सामने आया जब इन दोनों को एक पार्क के शौचालय में एक साथ घुसते हुए देखा गया। स्थानीय लोगों ने यह देखकर शरिया पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों को शौचालय में एक-दूसरे को चूमते और गले लगाते हुए पकड़ा। अदालत ने इसे यौन कृत्य मानते हुए शरिया कानून के तहत दोषी करार दिया।
बंद कमरे में चलाया गया मुकदमा
मुकदमा बंद कमरे में चला क्योंकि शरिया कानून के तहत व्यभिचार और नैतिकता से जुड़े मामलों में अदालत को यह अधिकार है कि वह कार्यवाही को गोपनीय रखे। हालांकि, फैसला सार्वजनिक रूप से सुनाया गया और सजा भी आम जनता के सामने दी गई। सोशल मीडिया पर कई लोग इसकी तुलना तालिबान से कर रहे हैं।
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2015 से लागू है शरिया कानून
आसेह इंडोनेशिया का एकमात्र प्रांत है, जहां शरिया कानून का औपचारिक रूप से पालन किया जाता है। देश के बाकी हिस्सों की तुलना में आसेह को धार्मिक रूप से अधिक कट्टर माना जाता है। साल 2015 में यहां शरिया कानून को औपचारिक रूप से लागू किया गया था। तब से यह समलैंगिकता के मामले में सार्वजनिक रूप से बेंत मारने की पांचवीं घटना है।
हालांकि इंडोनेशिया की राष्ट्रीय आपराधिक संहिता में समलैंगिकता को अपराध नहीं माना गया है, लेकिन आसेह को शरिया कानून लागू करने की विशेष स्वायत्तता प्राप्त है। केंद्र सरकार के पास इस कानून को रद्द करने का अधिकार नहीं है।
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शरिया कानून क्या है?
शरिया एक इस्लामी कानून व्यवस्था है जो क़ुरआन, हदीस, इज्मा (इस्लामी विद्वानों की सर्वसम्मत राय) और कियास (तर्कसंगत विश्लेषण) पर आधारित होती है। ‘शरिया’ का अर्थ होता है ‘ईश्वर द्वारा तय किया गया मार्ग’। यह केवल न्यायिक प्रणाली नहीं है, बल्कि जीवन के हर पहलू जैसे व्यक्तिगत आचरण, विवाह, तलाक, व्यापार, विरासत, खानपान और पूजा तक को प्रभावित करती है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
