टैरिफ के डर से रूस से तेल नहीं खरीद रहा भारत...ट्रंप के मंत्री का दावा, बोले- निशाने पर चीन-यूरोप

US-India Trade Deal: अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भारत ने रूस से तेल की खरीद लगभग बंद कर दी है, अमेरिकी टैरिफ दबाव के कारण, जबकि चीन और यूरोप अभी भी खरीद रहे हैं।
US-India Trade Deal
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Scott Bessent on Russian oil imports: भारत और अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड डील को लेकर बातचीत जारी है, इसी बीच अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के एक बयान ने हलचल मचा दी है। फॉक्स बिजनेस को दिए इंटरव्यू में बेसेंट ने दावा किया कि भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद लगभग पूरी तरह बंद कर दी है। उनका कहना है कि यह बदलाव अमेरिका की सख्त टैरिफ नीति के बाद देखने को मिला है।

स्कॉट बेसेंट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला किया था। इस कदम के बाद भारत ने रूस से तेल आयात में कटौती की और अब यह लगभग बंद हो चुका है। बेसेंट ने कहा कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में रियायती दरों पर तेल खरीदना शुरू किया था, लेकिन अमेरिकी दबाव के चलते उसने अपना रुख बदला।

अमेरिका के निशाने पर यूरोप और चीन

अमेरिकी वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि जहां भारत ने अमेरिकी दबाव को गंभीरता से लिया, वहीं यूरोप और चीन अब भी रूस से तेल खरीद रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन सस्ते दामों पर रूसी तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से उस युद्ध को फंड कर रहा है, जो रूस खुद लड़ रहा है। बेसेंट के मुताबिक, अमेरिका अब ऐसे देशों के खिलाफ और कठोर कदम उठाने की तैयारी में है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सीनेट में एक बिल पेश किया है। इस बिल में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कम से कम 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान है। इस पर पूछे गए सवाल के जवाब में बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति को ऐसी कार्रवाई के लिए सीनेट की मंजूरी जरूरी नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय आपातकाल आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति खुद यह फैसला ले सकते हैं। हालांकि, अगर यह बिल पास हो जाता है तो राष्ट्रपति के अधिकार और मजबूत हो जाएंगे।

भारत का पक्ष: ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि

भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि उसकी ऊर्जा नीति व्यावहारिक जरूरतों पर आधारित है। भारत का कहना है कि वह वैश्विक बाजार की परिस्थितियों और अपने नागरिकों को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने को प्राथमिकता देता है। भारत ने रूसी तेल की खरीद को हमेशा अपने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा से जोड़कर देखा है।

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