‘जख्मी शेर’ जैसा खतरनाक… सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने ट्रंप से कहा- ये जंग रोकने का वक्त नहीं!
US Saudi Iran War: सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने डोनाल्ड ट्रंप से ईरान पर हमले तेज करने का आग्रह किया है। उन्होंने इसे मिडिल ईस्ट के पुनर्गठन का एक 'अवसर' बताया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Saudi Arabia Urges Iran Attack: पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच का महायुद्ध अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। ताज़ा रिपोर्ट्स और खुफिया सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब ने अमेरिका से ईरान पर सैन्य हमले और अधिक तेज करने का आग्रह किया है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को स्पष्ट संदेश दिया है कि वे ईरान के खिलाफ शुरू किए गए इस सैन्य अभियान को बीच में न रोकें।
मिडिल ईस्ट को बदलने का अवसर
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट, जिसे सऊदी खुफिया सूत्रों ने पुष्टि करते हुए बताया कि क्राउन प्रिंस इस युद्ध को पूरे Middle East की राजनीति और शक्ति संतुलन को फिर से बदलने के एक ‘ऐतिहासिक अवसर’ के रूप में देख रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी क्राउन प्रिंस के इस कड़े रुख का समर्थन किया है। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि हां वह एक योद्धा हैं। वह हमारे साथ लड़ रहे हैं।
जंग में सीधे शामिल होने पर विचार
सऊदी अरब वर्तमान में सीधे तौर पर युद्ध में सक्रिय नहीं है लेकिन खुफिया सूत्रों का दावा है कि रियाद इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है। सऊदी भू-राजनीतिक विश्लेषक मोहम्मद अलहामेद के अनुसार, रियाद अपनी प्रतिक्रिया को बहुत सावधानी से कैलकुलेट कर रहा है। यदि पाकिस्तान के नेतृत्व में जारी शांति वार्ता विफल होती है और ईरान अपने हमले बंद नहीं करता है तो सऊदी अरब सीधे सैन्य कार्रवाई का विकल्प चुन सकता है।
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ईरान के ड्रोन हमलों ने बढ़ाई सऊदी की चिंता
ईरान ने पहले ही सऊदी अरब के तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। पिछले हफ्ते लाल सागर स्थित ‘यानबू’ तेल रिफाइनरी पर ईरानी ड्रोन से हमला किया गया था। यह हमला रियाद के लिए एक गंभीर चेतावनी थी कि ईरान न केवल Strait of Hormuz को प्रभावित कर सकता है बल्कि सऊदी अरब की आर्थिक जीवन रेखाओं को भी खतरे में डाल सकता है। इसी खतरे को भांपते हुए सऊदी अरब अब ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह से समाप्त करने के पक्ष में है।
‘जख्मी शेर’ को खत्म करने की नीति
सऊदी सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय युद्ध को रोकना आत्मघाती हो सकता है। सऊदी विशेषज्ञ खालिद अलजबरी के अनुसार, ‘एक आंशिक रूप से कमजोर या घायल शेर पहले से कहीं अधिक खतरनाक और अप्रत्याशित हो सकता है। हमारी नीति यह है कि युद्ध शुरू न करें लेकिन यदि शुरू हो गया है तो काम खत्म करें।’
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संयुक्त अरब अमीरात का मिला समर्थन
सऊदी अरब के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी ईरान की निर्णायक सैन्य हार का आह्वान किया है। अमेरिका में यूएई के राजदूत ने स्पष्ट किया है कि केवल युद्धविराम पर्याप्त नहीं होगा बल्कि एक ऐसा परिणाम चाहिए जो ईरान के सभी खतरों को जड़ से खत्म कर दे। अब पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप प्रशासन रियाद और यूएई की इस मांग को स्वीकार करते हुए ईरान के खिलाफ अपने हमलों की तीव्रता को और अधिक बढ़ाएगा।
