मिडिल ईस्ट में महासंग्राम? सऊदी अरब ने यूएई को अलग-थलग करने का बनाया ‘मास्टर प्लान’, लाल सागर पर छिड़ी जंग!
Saudi Arabia UAE Tension: सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तनाव चरम पर है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने यूएई को मिडिल ईस्ट में अलग-थलग करने के लिए मिस्र और यमन के साथ गुप्त समझौता किया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
सऊदी अरब यूएई तनाव, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Middle East Tension News In Hindi: मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आता दिख रहा है। कभी करीबी सहयोगी रहे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बनते जा रहे हैं।
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब ने पूरे मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र से यूएई का प्रभाव खत्म करने और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की एक विस्तृत योजना तैयार की है। इस रणनीतिक लड़ाई का मुख्य केंद्र लाल सागर है, जहां सऊदी अरब अब यूएई के बढ़ते दखल को पूरी तरह समाप्त करना चाहता है।
मिस्र और यमन के साथ सऊदी का गठबंधन
सऊदी अरब ने इस योजना को अंजाम देने के लिए क्षेत्र के अन्य मजबूत देशों, विशेषकर मिस्र और यमन के साथ गठबंधन मजबूत करना शुरू कर दिया है। इस त्रिकोणीय समझौते का मुख्य उद्देश्य लाल सागर के व्यापारिक और रणनीतिक मार्गों से यूएई के नियंत्रण को हटाना है।
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वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब की नजर विशेष रूप से यूएई के उन ठिकानों पर है जो लाल सागर को सीधे नियंत्रित करते हैं जिनमें मयून, अब्द अल-कुरी और जुकर द्वीप शामिल हैं। इन द्वीपों पर वर्तमान में यूएई समर्थित मिलिशिया का कब्जा है, जिन्हें बेदखल करने की तैयारी की जा रही है।
मीडिया वॉर और गंभीर आरोप
सऊदी अरब ने केवल कूटनीतिक ही नहीं, बल्कि मीडिया के स्तर पर भी यूएई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सऊदी न्यूज चैनल al-Ekhbariya ने अपनी हालिया रिपोर्ट्स में यूएई पर यमन में अलगाववादियों का समर्थन करने और वहां गुप्त जेलों का संचालन करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
सऊदी मीडिया का दावा है कि यूएई की ये गतिविधियां सऊदी अरब की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं। इसके अलावा, यह आरोप भी लगाया गया है कि यूएई पर्दे के पीछे से सोमालिया और सूडान में गृहयुद्ध को भड़का रहा है।
तनाव की क्या है असली वजह?
जानकारों का मानना है कि दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट साल 2025 के अंत में शुरू हुई। उस समय यूएई समर्थित एसटीसी ने यमन के दक्षिणी इलाकों पर अकेले कब्जा करना शुरू कर दिया था जिसे सऊदी अरब ने एक बड़े ‘विश्वासघात’ के रूप में देखा। इसके बाद सऊदी ने जवाबी कार्रवाई शुरू की, जिसके परिणामस्वरूप यूएई को सोमालिया और हरदामौथ जैसे इलाकों से बाहर होना पड़ा।
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क्या है विजन 2030?
इस पूरे टकराव के केंद्र में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) की महत्वाकांक्षाएं हैं। एमबीएस साल 2030 तक सऊदी अरब को मिडिल ईस्ट का सबसे शक्तिशाली और एकमात्र नेतृत्वकर्ता देश बनाना चाहते हैं। इसके लिए वे यूएई जैसी उभरती क्षेत्रीय ताकतों के प्रभाव को सीमित करने में जुटे हैं। इस बढ़ते तनाव ने अमेरिका की भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि दोनों ही देश वाशिंगटन के करीबी रणनीतिक साझेदार माने जाते हैं।
