रूस का यूक्रेन पर हमला, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Russia Attacked Ukraine News Hindi: अमेरिका की मध्यस्थता में होने वाली अगली शांति वार्ता को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध ने एक बार फिर विनाशकारी मोड़ ले लिया है। रूस ने बुधवार रात से गुरुवार तक यूक्रेन के रिहायशी इलाकों और बिजली ग्रिड को निशाना बनाते हुए एक साथ 219 लंबी दूरी के ड्रोन और 24 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।
यूक्रेनी वायुसेना के अनुसार, इन हमलों का मुख्य निशाना राजधानी कीव, दूसरा सबसे बड़ा शहर खारकीव, मध्य यूक्रेन का निप्रो और दक्षिणी बंदरगाह शहर ओडेसा रहे।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका ने अगले सप्ताह मियामी या संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबूधाबी में दूसरे दौर की वार्ता का प्रस्ताव दिया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पुष्टि की है कि उनका देश बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने दावा किया कि रूस इस प्रक्रिया को लेकर ‘हिचकिचाहट’ दिखा रहा है। गौरतलब है कि अमेरिका ने दोनों देशों को जून 2026 तक किसी समझौते पर पहुंचने की समयसीमा दी है लेकिन गहरे मतभेदों के कारण फिलहाल कोई रास्ता निकलता नहीं दिख रहा है।
Repair crews and first responders have been working since last night at the sites of Russian strikes. During the night, 219 attack drones were launched, a significant number of them “shaheds,” along with 25 missiles, 24 of them ballistic. Most of them were successfully… pic.twitter.com/pLEYGUXWwG — Volodymyr Zelenskyy / Володимир Зеленський (@ZelenskyyUa) February 12, 2026
रूसी गोलाबारी के जवाब में यूक्रेन ने भी अब तक का सबसे बड़ा और लंबी दूरी का हमला कर मॉस्को को चौंका दिया है। यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने बताया कि उनके स्वदेशी रूप से विकसित ड्रोन ने रूस के कोमी क्षेत्र में स्थित उख्ता तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया जो यूक्रेनी सीमा से लगभग 1750 किलोमीटर दूर है। यह यूक्रेनी ड्रोनों की अब तक की सबसे लंबी उड़ान बताई जा रही है।
ड्रोन हमलों के अलावा, यूक्रेन ने अपनी स्वदेशी ‘फ्लेमिंगो’ लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल कर वोल्गोग्राद क्षेत्र में रूसी सेना के गोला-बारूद और विस्फोटकों के सबसे बड़े भंडारण स्थल को नष्ट कर दिया है। इसके साथ ही ताम्बोव क्षेत्र में एक रक्षा संयंत्र ‘मिचुरिंस्क प्रोग्रेस प्लांट’ और वोल्गोग्राद तेल रिफाइनरी को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया है। युद्ध की चौथी वर्षगांठ के करीब दोनों देशों के बीच बढ़ा यह सैन्य तनाव एक बड़े क्षेत्रीय संकट की ओर इशारा कर रहा है।