इजरायल डेविड स्लिंग टेस्ट, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Israel Air Defense System: मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच इजरायल ने अपनी रक्षा क्षमताओं को एक नई ऊँचाई पर पहुँचा दिया है। इजरायल की उन्नत वायु रक्षा प्रणाली ‘डेविड्स स्लिंग’ ने भविष्य के मिसाइल खतरों, विशेष रूप से ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए किए गए कई जटिल और चुनौतीपूर्ण परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परीक्षण इजरायल की सुरक्षा रणनीति में एक मील का पत्थर साबित होंगे।
इजरायली रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि ये नए परीक्षण जून 2025 में ईरान के साथ हुए 12 दिनों के युद्ध से प्राप्त ‘परिचालन अनुभवों’ पर आधारित थे। उस तनाव के दौरान, डेविड्स स्लिंग ने अपनी क्षमताओं से परे जाकर प्रदर्शन किया था।
हालांकि इसे मूल रूप से मध्यम दूरी के लिए बनाया गया था लेकिन युद्ध के दौरान इसने लगभग 1500 किलोमीटर दूर से दागी गई लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को भी सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया था। सेना के आंकड़ों के अनुसार, उस दौरान तेहरान द्वारा दागी गई 550 बैलिस्टिक मिसाइलों और 1000 से अधिक ड्रोनों में से करीब 85 प्रतिशत को सफलतापूर्वक मार गिराया गया था।
‘राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स’ द्वारा विकसित यह प्रणाली 40 से 300 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के रॉकेट, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों, विमानों तथा ड्रोन को मार गिराने में सक्षम है। अब इसके नए Upgrade के बाद, यह उभरते हुए ‘हाइपरसोनिक’ खतरों से निपटने के लिए और भी अधिक सटीक हो गई है। यह प्रणाली इजरायल के बहु-स्तरीय रक्षा ढांचे का मध्य स्तर है, जिसमें छोटी दूरी के लिए ‘आयरन डोम’ और लंबी दूरी के लिए ‘एरो’ प्रणालियां शामिल हैं।
डेविड्स स्लिंग का एक बड़ा फायदा इसकी परिचालन लागत है। जहां लंबी दूरी की ‘एरो-3’ प्रणाली की एक मिसाइल दागने का खर्च 25 लाख डॉलर से अधिक आता है, वहीं डेविड्स स्लिंग की एक मिसाइल की लागत लगभग 10 लाख डॉलर है। इसके सफल उन्नयन से अब एरो-3 प्रणाली पर दबाव कम होगा क्योंकि अब डेविड्स स्लिंग भी उच्च-स्तरीय खतरों को प्रभावी ढंग से रोकने में सक्षम है।
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इन परीक्षणों की घोषणा उस समय की गई है जब प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उच्च-स्तरीय वार्ता कर रहे हैं। यह परीक्षण तेहरान के लिए एक कड़ा संदेश है कि इजरायल किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि परीक्षणों की सफलता प्रणाली के तकनीकी और परिचालन उन्नयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे भविष्य में कई जानें बचाई जा सकेंगी।