स्टार्मर की धमकी बेअसर! ब्रिटेन के समंदर में खुलेआम घूम रहे रूसी ‘शैडो फ्लीट’ जहाज, नौसेना बेबस
Russia Shadow Fleet UK Waters: ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर की कड़ी चेतावनी के बावजूद रूस के 'शैडो फ्लीट' जहाज बिना किसी रोक-टोक के ब्रिटिश जलक्षेत्र से गुजर रहे हैं।
- Written By: अमन उपाध्याय
शैडो फ्लीट, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Russia Shadow Fleet UK Waters Security Threat: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर द्वारा रूस के ‘शैडो फ्लीट’ जहाजों को रोकने की दी गई धमकियां फिलहाल खोखली साबित होती दिख रही हैं। आंकड़ों और विश्लेषणों से पता चला है कि प्रतिबंधों के बावजूद रूस के ये जहाज बिना किसी डर के ब्रिटेन के जलक्षेत्र से गुजर रहे हैं और अपना माल ढो रहे हैं। ब्रिटेन की नौसेना की घटती क्षमता और जटिल कानूनी अड़चनों के कारण रूसी जहाजों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
क्या है जमीनी हकीकत?
पिछले महीने 25 मार्च को पीएम कीर स्टार्मर ने रूस को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि ब्रिटिश सैनिक उनके ‘शैडो फ्लीट’ के जहाजों पर चढ़कर उनकी जांच करेंगे और उन्हें कब्जे में ले लेंगे। हालांकि, समाचार एजेंसी रॉयटर्स के के अनुसार, इस चेतावनी का कोई खास असर नहीं हुआ है।
चेतावनी के बाद के एक महीने में कम से कम 98 प्रतिबंधित रूसी जहाज ब्रिटेन के जलक्षेत्र से गुजरे, जो पिछले महीनों के औसत के बराबर ही है। अब तक इन जहाजों में से किसी को भी रोकने या हिरासत में लेने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
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क्या है ‘शैडो फ्लीट’ और रूस की चाल?
‘शैडो फ्लीट’ उन जहाजों के नेटवर्क को कहा जाता है जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और निगरानी से बचकर तेल, गैस या अन्य सामान ढोने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। ये जहाज आधिकारिक तौर पर किसी देश या बड़ी कंपनी से जुड़े नहीं दिखते, जिससे रूस यूक्रेन युद्ध के बीच पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को चकमा देने में सफल रहता है।
डेटा के अनुसार, 63 जहाज इंग्लिश चैनल के रास्ते ब्रिटेन के तट के बेहद करीब (12 नॉटिकल मील के भीतर) से गुजरे, जबकि 35 अन्य जहाज ब्रिटेन के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) से होकर निकले।
ब्रिटिश नौसेना की मजबूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन की इस नाकामी के पीछे कई बड़े कारण हैं। कभी दुनिया की सबसे बड़ी समुद्री ताकत रहे ब्रिटेन के पास वर्तमान में 17वीं सदी के बाद की सबसे छोटी नौसेना है। इसके अलावा, ब्रिटेन पर पूर्वी यूरोप, आर्कटिक और मध्य पूर्व में अपने सहयोगियों की मदद करने का भी भारी दबाव है।
फ्रांस और स्वीडन जैसे देशों के पास मजबूत तटरक्षक बल (Coast Guard) है जिन्होंने हाल ही में रूसी जहाजों को रोका है, लेकिन ब्रिटेन के पास ऐसी क्षमताओं की कमी है।
जहाजों की ‘स्पूफिंग’ और रूस का रुख
जांच में यह भी सामने आया है कि ब्रिटेन के जलक्षेत्र से गुजरने वाले कम से कम 10 जहाजों ने ‘स्पूफिंग’ (Spoofing) का सहारा लिया, यानी उन्होंने अपने ट्रैकिंग सिस्टम को बंद कर दिया या अपनी गलत लोकेशन दिखाई।
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वहीं, रूस ने ब्रिटेन की इस नीति को ‘दुश्मनी भरा’ करार दिया है और कहा है कि उसके जहाजों पर लगाए गए प्रतिबंध पूरी तरह से गैरकानूनी हैं। समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ब्रिटेन जल्द ही कोई ठोस बोर्डिंग कार्रवाई नहीं करता है तो रूस और अन्य देश इसे केवल एक खाली धमकी ही मानेंगे।
