

रियो डी जेनेरियो: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से अलग से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्तों, पश्चिम एशिया की स्थिति, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
एस. जयशंकर ने एक्स पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि BRICS 2025 के इतर सर्गेई लावरोव से मिलना सुखद रहा। उन्होंने बताया कि मुलाकात के दौरान कई अहम विषयों पर चर्चा हुई, जिनमें आपसी सहयोग, क्षेत्रीय हालात और बहुपक्षीय मंच शामिल रहे। इससे पहले रूसी विदेश मंत्रालय ने दोनों मंत्रियों की एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें बताया गया था कि यह बातचीत ब्रिक्स सम्मेलन से हटकर हुई है।
इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात इस साल फरवरी में जोहान्सबर्ग में हुई थी, जहां उन्होंने भारत और रूस के बीच जारी द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति पर बातचीत की थी। हाल ही में ब्रिक्स का 17वां शिखर सम्मेलन ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित हुआ, जिसमें ब्रिक्स समूह के नेता शामिल हुए। ब्राजील की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में पारंपरिक सदस्य देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा नए सदस्य देशों मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया के नेता भी एकत्र हुए।
रविवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ रुख सिर्फ परिस्थितियों के आधार पर नहीं, बल्कि एक स्थायी सिद्धांत होना चाहिए। उन्होंने इसे आज की वैश्विक स्थिति में मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती करार दिया। ब्रिक्स के शांति और सुरक्षा सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का उल्लेख करते हुए इसे वैश्विक शांति के लिए एक गंभीर खतरे की चेतावनी बताया।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ खड़े होने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हमला भारत की आत्मा, उसकी पहचान और सम्मान पर सीधा हमला था।
उन्होंने कहा कि आज आतंकवाद मानवता के सामने सबसे बड़ी और गंभीर चुनौती बन चुका है। हाल ही में भारत को एक बर्बर और कायरतापूर्ण आतंकी हमले का सामना करना पड़ा। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुआ यह हमला केवल भारत की आत्मा, पहचान और गरिमा पर नहीं, बल्कि समूची मानवता की चेतना पर चोट था। इस कठिन समय में, मैं उन सभी मित्र देशों के प्रति आभार प्रकट करता हूं जिन्होंने हमारे साथ एकजुटता दिखाई और अपनी सहानुभूति तथा समर्थन व्यक्त किया।