रूस चीन ईरान नेवल एक्सरसाइज से बढ़ी टेंशन, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Trump Iran War Plan: पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल तेजी से गहराते जा रहे हैं। एक तरफ अमेरिका द्वारा ईरान पर संभावित हमले की खबरें तेज हो रही हैं तो दूसरी तरफ रूस और चीन ने ईरान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन शुरू कर दिया है। रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में रूस, चीन और ईरान ने ‘मैरीटाइम सिक्योरिटी बेल्ट 2026’ के तहत अपने शक्तिशाली युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। भू-राजनीतिक थिंक-टैंक ग्लोबल सर्विलांस ने इस कदम को ‘अचानक और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण’ करार दिया है।
रूसी रक्षा मंत्रालय और ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, रूस का अत्याधुनिक युद्धपोत ‘स्टोइकी’ ईरान के रणनीतिक बंदर अब्बास बंदरगाह पर पहुंच चुका है। यह बंदरगाह ईरान की नौसेना का मुख्य ठिकाना माना जाता है। रूस द्वारा जारी एक वीडियो में इस युद्धपोत को ईरानी तट पर पहुंचते हुए देखा जा सकता है जो इस क्षेत्र में बढ़ते सैन्य सहयोग का सीधा प्रमाण है।
यह संयुक्त अभ्यास ओमान की खाड़ी और उत्तरी हिंद महासागर के व्यापक क्षेत्रों में आयोजित किया जा रहा है जिसका आधिकारिक उद्देश्य समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना और नागरिक जहाजों की रक्षा करना बताया गया है।
यह सैन्य शक्ति प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिकी मीडिया में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले की योजना की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान पर कार्रवाई के लिए 12 वॉरशिप और सैकड़ों फाइटर जेट्स पूरी तरह तैयार कर लिए हैं।
सीएनएन (CNN) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सैन्य तैयारी काफी आगे बढ़ चुकी है और अब केवल राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। इस तनाव के बीच ईरान ने सक्रिय NOTAM (नोटिस टू एयरमैन) भी जारी किया है, जिससे पायलटों को संभावित हवाई खतरों के प्रति आगाह किया गया है, जो इस बात का संकेत है कि ईरान किसी भी हमले का जवाब देने के लिए हाई अलर्ट पर है।
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ युद्ध की तैयारियां और जंगी जहाजों की तैनाती चल रही है वहीं दूसरी तरफ स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि परमाणु कार्यक्रम पर महत्वपूर्ण बातचीत भी कर रहे हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय ने अपने टेलीग्राम चैनल पर जानकारी दी है कि रूसी और ईरानी नौसेनाओं ने मिलकर मिसाइलें दागने और नागरिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अभ्यास किया है।
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इस त्रिपक्षीय गठबंधन की होर्मुज स्ट्रेट में मौजूदगी को सीधे तौर पर अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है जो क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य प्रभुत्व को संतुलित करने का प्रयास है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रूस और चीन के इस खुले समर्थन के बाद अमेरिका अपने कदम पीछे खींचेगा या यह तनाव एक व्यापक वैश्विक संघर्ष का रूप ले लेगा।