रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-AI डिज़ाइन)
Diplomatic Solution For Middle East: पिछले चार साल से खुद यूक्रेन के साथ युद्ध में उलझे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अब पश्चिम एशिया में शांतिदूत की भूमिका में नजर आ रहे हैं। मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई टेलीफोनिक बातचीत में पुतिन ने ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी भीषण जंग को रोकने का एक ठोस प्रस्ताव पेश किया है। मध्य पूर्व के लिए कूटनीतिक समाधान को लेकर हुई इस चर्चा ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है क्योंकि ईरान रूस का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और पुराना सहयोगी माना जाता है। 11 दिनों से जारी इस महाजंग के बीच दोनों शीर्ष नेताओं की यह बातचीत वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरी है।
रूस के राष्ट्रपति पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच लगभग एक घंटे तक चली इस लंबी बातचीत की पहल अमेरिका की ओर से की गई थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की नाजुक स्थिति और 28 फरवरी से शुरू हुए इस खतरनाक युद्ध को समाप्त करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। पुतिन ने जोर देकर कहा कि इस सैन्य अभियान को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक रास्ते तलाशना अब समय की सबसे बड़ी मांग है।
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रही यह जंग पिछले 11 दिनों से बिना रुके जारी है जिसने पूरे क्षेत्र को एक गंभीर मानवीय संकट में डाल दिया है। पुतिन ने स्पष्ट किया कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और इससे केवल वैश्विक अस्थिरता ही बढ़ेगी, इसलिए तुरंत समाधान निकालना जरूरी है। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भविष्य में और अधिक नुकसान से बचने के लिए संवाद के दरवाजे खुले रखना दोनों देशों के हित में है।
ईरान के मुद्दे के अलावा राष्ट्रपति पुतिन ने ट्रंप को यूक्रेन के मोर्चे पर चल रही जमीनी हकीकत और रूसी सेना की हालिया सफलताओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फ्रंटलाइन पर रूसी सैनिक लगातार आगे बढ़ रहे हैं और उन्हें रणनीतिक रूप से कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़ी कामयाबी हासिल हो रही है। दिसंबर के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली आधिकारिक बातचीत है जो यूक्रेन और ईरान दोनों ही मोर्चों पर भविष्य की दिशा तय कर सकती है।
यूक्रेन में चल रहे सैन्य अभियान को चार साल पूरे होने वाले हैं और पुतिन का अब पीसमेकर बनना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। उन्होंने ट्रंप को आश्वस्त किया कि रूस क्षेत्र में शांति चाहता है लेकिन अपनी सुरक्षा और हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। ट्रंप ने भी पुतिन की बातों को ध्यान से सुना और यूक्रेन संकट के समाधान के लिए चल रही द्विपक्षीय वार्ताओं के महत्व पर जोर दिया।
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क्रेमलिन के अनुसार पुतिन अब एक ‘पीसमेकर’ की भूमिका निभाते हुए ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच के तनाव को कम करने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। ईरान की सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर रूस हमेशा संवेदनशील रहा है, इसलिए पुतिन का यह शांति प्रस्ताव युद्ध के मैदान में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप पुतिन के इस शांति फॉर्मूले को स्वीकार कर पश्चिम एशिया को विनाश से बचाएंगे।
ईरान को रूस का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सहयोगी माना जाता है और उसकी सुरक्षा रूस की विदेश नीति का एक अभिन्न हिस्सा रही है। पुतिन का मानना है कि अगर अमेरिका और इजराइल अपनी सैन्य कार्रवाई रोक देते हैं, तो बातचीत के जरिए एक सम्मानजनक समाधान निकाला जा सकता है। इस टेलीफोन कॉल ने न केवल रूस और अमेरिका के बीच संवाद को बहाल किया है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में छाई अनिश्चितता को भी कम किया है।