क्या सच दबा रहा है पाकिस्तान? PoK में बर्बरता की रिपोर्टिंग पर अल-जजीरा वेबसाइट पर लगाया बैन
PoK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हिंसा और विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के बाद पाकिस्तान सरकार ने अल जजीरा वेबसाइट को बैन कर दिया है। सेना की कार्रवाई में 80 लोग मारे गए हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
पीओके प्रदर्शन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Pakistan Bans Al Jazeera Amid PoK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में लगातार जारी भारी विरोध प्रदर्शनों और भयंकर हिंसा की रिपोर्टिंग के बाद पाकिस्तान सरकार पूरी तरह से बौखला गई है। शहबाज शरीफ की सरकार ने देश में नैरेटिव को अपने कड़े नियंत्रण में रखने के लिए अल जजीरा इंग्लिश समेत कई डिजिटल न्यूज वेबसाइट्स पर कथित रूप से रोक लगा दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन सभी वेबसाइट्स के पूरी तरह बैन होने के कारण इंटरनेट यूजर्स इन प्लेटफॉर्म्स को बिल्कुल भी नहीं खोल पा रहे हैं। सेना प्रमुख आसिम मुनीर के आदेश पर पाकिस्तानी सेना पीओके के अंदर बहुत ही ज्यादा बर्बरता और कत्लेआम मचा रही है जिसकी खबरें बाहर जाने से सरकार बहुत डर गई है। हालांकि सरकार ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
यूट्यूब चैनलों पर कड़ा एक्शन
इससे पहले अल जजीरा ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में बताया था कि इस्लामाबाद की एक अदालत में पाकिस्तान की नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) ने कड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, कई बड़े विपक्षी नेताओं और सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों से जुड़े कई यूट्यूब चैनलों को तुरंत ब्लॉक करने की भारी मांग की थी।
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कंटेंट क्रिएटर्स को चेतावनी
रिपोर्ट के मुताबिक यूट्यूब ने अदालत के निर्देशों का कड़ाई से पालन नहीं करने पर 27 कंटेंट क्रिएटर्स को बहुत ही सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी। इसके अलावा जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने कुछ वीडियो जारी करके दावा किया है कि मुजफ्फराबाद में सुरक्षा बलों ने एक निहत्थे व्यक्ति के साथ खुलेआम भारी मारपीट की है।
80 लोगों की दर्दनाक मौत
इस भयंकर घटना के दौरान सादे कपड़ों में मौजूद एक व्यक्ति ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की ओर सीधे तौर पर अपनी बंदूक से गोली भी चलाई है। दूसरी तरफ ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ पाकिस्तान-ऑक्यूपाइड जम्मू एंड कश्मीर (HRC-PoJK) के हवाले से एक बहुत ही चौंकाने वाला और बड़ा दावा किया गया है कि अशांति में अब तक 80 मौतें हुई हैं।
अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग
इस रिपोर्ट के अनुसार मारे गए इन 80 लोगों में 76 बेगुनाह नागरिक और चार पुलिसकर्मी भी मुख्य रूप से शामिल बताए गए हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तान की इन सभी हिंसक हरकतों और संगीन आरोपों की पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की बहुत बड़ी मांग अंतरराष्ट्रीय मंचों से की है।
चुनाव में भी हुआ भारी बवाल
समिति ने संयुक्त राष्ट्र, एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच, आईसीआरसी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की भारी अपील की है। इसके अलावा पीओके में दूसरे चरण के चुनाव के दौरान भी लगातार विरोध प्रदर्शन, सड़क जाम और बहुत ज्यादा प्रशासनिक अव्यवस्था की कई खबरें सामने आई थीं।
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर खतरा
चुनाव के दौरान हुई इन हिंसक घटनाओं के बाद से ही पूरी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और आम लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। पाकिस्तान सरकार अपनी सेना की नाकामी और जुल्म को दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए विदेशी मीडिया की आवाज को पूरी ताकत के साथ दबाने की कोशिश कर रही है।
सड़कों पर उतरे आम नागरिक
कश्मीर के निर्दोष और बेकसूर लोग लगातार अपनी आजादी और बुनियादी हकों के लिए पाकिस्तानी हुक्मरानों के खिलाफ सड़कों पर उतरकर अपना भारी गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। हालात को तुरंत काबू में करने के लिए दुनिया के बड़े देशों को इस मानवाधिकार हनन के मुद्दे पर अपना मजबूत रुख पाकिस्तान के खिलाफ जल्द से जल्द अपनाना होगा।
