

Deadly PoK Protest Violence: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में इन दिनों भारी विरोध प्रदर्शन और हिंसा लगातार जारी है। इस बिगड़ते हालात पर भारत सरकार ने अपनी बहुत ही कड़ी प्रतिक्रिया दुनिया के सामने आधिकारिक रूप से रखी है। भारत ने वहां हो रहे इस बवाल और अशांति के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान को ही जिम्मेदार ठहराया है। विदेश मंत्रालय ने इस पूरे मामले को लेकर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना करते हुए इस क्रूरता को तुरंत रोकने की मांग की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को इस गंभीर मुद्दे पर अहम और बहुत बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पीओके में मौजूदा अशांति पाकिस्तान के दशकों पुराने सुनियोजित शोषण का ही एक सीधा नतीजा है। पाकिस्तान वहां के लोगों को उनके बुनियादी अधिकारों से लगातार वंचित रख रहा है और उन पर भारी प्रशासनिक दबाव बना रहा है। स्थानीय लोगों की जायज मांगों को अनसुना करके उन पर पुलिस द्वारा काफी ज्यादा बर्बरता की जा रही है जो अनुचित है।
रावलकोट शहर में मंगलवार को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच एक बहुत ही भयानक और हिंसक झड़प हुई थी। इस हिंसक झड़प के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की भारी गोलीबारी में छह निर्दोष नागरिकों की बहुत ही दर्दनाक मौत हो गई। इस बड़ी और दुखद घटना के बाद से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में तनाव बहुत ही ज्यादा बढ़ गया है। लोग पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना के खिलाफ सड़कों पर उतरकर अपना भारी गुस्सा और बहुत कड़ा विरोध जता रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हिंसा के यह नए मामले शहर के एक बड़े बस टर्मिनल के पास मुख्य रूप से हुए हैं। वहां तैनात पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर अचानक से अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी थी। इस भयंकर गोलीबारी में जाहिद मुगल, जफर मुगल, अर्सलान अकबर और वाजिद हयात जैसे कई मासूम लोगों की जान चली गई। बताया जा रहा है कि वाजिद हयात की दर्दनाक मौत मटियाल मीरा बस टर्मिनल पर हुई थी जिसके बाद काफी बवाल हुआ।
पीओके में हो रही इस भारी हिंसा की गूंज अब अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन तक भी पूरी तरह से पहुंच चुकी है। वहां रहने वाले पीओके समुदाय के लोगों ने व्हाइट हाउस के बाहर भारी संख्या में जमा होकर एक बहुत बड़ा विरोध प्रदर्शन किया है। इस शांतिपूर्ण रैली में लगभग 100 लोग शामिल हुए जिनमें महिलाएं, छोटे बच्चे और समुदाय के कई बड़े नेता भी मौजूद थे। इन लोगों ने वहां तेजी से बिगड़ते मानवीय संकट की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान बहुत ही मजबूती से खींचने की मांग की है।
अमेरिका में प्रदर्शन कर रहे इन सभी नागरिकों ने पीओके के रिहायशी इलाकों से पाकिस्तानी सैनिकों को तुरंत हटाने की बड़ी मांग की है। उनका गंभीर और सीधा आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बल निहत्थे और मासूम लोगों के खिलाफ जरूरत से कहीं ज्यादा बल प्रयोग कर रहे हैं। भारत ने भी कहा है कि वहां बढ़ती महंगाई, भारी प्रशासनिक लापरवाही, राजनीतिक भेदभाव और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के कारण ही यह प्रदर्शन हो रहे हैं। पाकिस्तान पुलिस लोगों की सभी समस्याओं को दूर करने की बजाय उन पर बहुत ही ज्यादा और अत्यधिक क्रूरता कर रही है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस अत्यंत गंभीर मामले में तुरंत और बहुत सख्त कदम उठाने की अपील की है। भारत ने उम्मीद जताई है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान में हो रहे इन गलत कामों पर अपनी बहुत ही कड़ी और पैनी नजर रखेगा। मानवाधिकारों के इस खुले और शर्मनाक उल्लंघन के लिए पाकिस्तान को पूरी दुनिया के सामने जवाबदेह ठहराना बहुत ही ज्यादा जरूरी है। पीओके के निहत्थे नागरिकों को उनके सभी बुनियादी अधिकार हर हाल में बिना किसी भी देरी के मिलने ही चाहिए।