पनामा नहर से चीन की छुट्टी! सुप्रीम कोर्ट के फैसले से गदगद हुए ट्रंप, शी जिनपिंग को लगा बड़ा झटका

Panama Canal Supreme Court: पनामा की सुप्रीम कोर्ट ने पनामा नहर के बंदरगाहों पर चीनी कंपनी के नियंत्रण को असंवैधानिक करार दिया है। इस फैसले को राष्ट्रपति ट्रंप की बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है।
China is out of the Panama Canal! Trump is overjoyed by the Supreme Court's decision, a major blow to Xi Jinping.
ट्रम्प जिनपिंग पनामा नहर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Panama Canal News Hindi: पनामा की सर्वोच्च अदालत के एक ऐतिहासिक फैसले ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक व्यापार जगत में खलबली मचा दी है। कोर्ट ने पनामा नहर के दोनों सिरों पर बंदरगाहों का संचालन करने वाली हांगकांग की कंपनी 'सीके हचिशन होल्डिंग्स' को दी गई रियायत को असंवैधानिक करार दिया है।

यह फैसला न केवल चीन के आर्थिक हितों पर एक बड़ा प्रहार है बल्कि इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, जो लंबे समय से इस रणनीतिक जलमार्ग पर अमेरिकी नियंत्रण की वकालत कर रहे हैं।

ऑडिट में खुली अनियमितताओं की पोल

अदालत का यह सख्त फैसला पनामा के महालेखाकार द्वारा किए गए एक विशेष ऑडिट के बाद आया है। इस ऑडिट में यह खुलासा हुआ कि साल 2021 में चीनी कंपनी को दिए गए 25 साल के रियायत विस्तार में भारी अनियमितताएं बरती गई थीं। अमेरिकी प्रशासन के लिए यह मुद्दा हमेशा से प्राथमिकता पर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए पनामा को ही चुना था जहां उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि इन बंदरगाहों का संचालन अमेरिका के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है।

ट्रंप की मुराद हुई पूरी

डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार सत्ता संभालने के बाद सार्वजनिक रूप से कहा था कि पनामा को चाहिए कि वह इस नहर को वापस अमेरिका के नियंत्रण में सौंप दे। अब कोर्ट ने अमेरिकी मंशा के अनुरूप फैसला देकर ट्रंप को गदगद कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि अब इन बंदरगाहों का भविष्य क्या होगा और इनका प्रबंधन कौन संभालेगा। पनामा पोर्ट्स कंपनी (PPC) ने इस फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा है कि उन्हें अभी तक आधिकारिक सूचना नहीं मिली है, लेकिन वे इसे 'कानूनी आधार से रहित' मानते हैं।

चीन की जवाबी चेतावनी और वैश्विक असर

बीजिंग ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि चीन अपनी कंपनियों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि बंदरगाहों का संचालन फिलहाल नहीं रुकेगा लेकिन अब इसका नियंत्रण पनामा की मैरीटाइम अथॉरिटी के पास जा सकता है।

यह पूरा मामला इसलिए भी जटिल है क्योंकि सीके हचिशन होल्डिंग्स अपनी हिस्सेदारी ब्लैकरॉक इंक. वाले एक अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम को बेचना चाहती थी लेकिन चीन सरकार की आपत्तियों के कारण यह सौदा अधर में लटक गया था। अब अमेरिका और चीन के बीच इस 'कैनाल वॉर' ने वैश्विक शिपिंग लाइन्स के सामने नई अनिश्चितताएं खड़ी कर दी हैं।

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