34 देशों के बाद अब ब्रिटेन भी IRGC को घोषित करेगा आतंकी; जानिए क्यों दुनिया के सुपरपावर भी खाते हैं इससे खौफ

Iran War News: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड पर अमेरिका और फ्रांस समेत 34 देशों ने प्रतिबंध लगा दिया है। अब ब्रिटेन भी इसे आतंकी संगठन घोषित कर इस पर शिकंजा कसने की तैयारी में है।
After 34 other countries, Britain will now also designate the IRGC as a terrorist organization; find out why even the world's superpowers fear it.
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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IRGC Terrorist Organisation: मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) दुनिया के निशाने पर आ गई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, यूरोपीय यूनियन के बाद अब ब्रिटेन ने भी इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने का बड़ा फैसला लिया है।

इस कदम के बाद ब्रिटेन भी आधिकारिक तौर पर आईआरजीसी को एक आतंकवादी संगठन के रूप में मान्यता देगा। गौरतलब है कि ब्रिटेन से पहले अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब और बहरीन समेत दुनिया के 34 देश इस संगठन को आतंकी घोषित कर चुके हैं।

क्या है IRGC और क्यों हुई इसकी स्थापना?

आईआरजीसी की स्थापना साल 1979 में ईरान की इस्लामिक क्रांति के बाद की गई थी। यह संगठन ईरान की नियमित सेना से पूरी तरह अलग हटकर काम करता है। शोधकर्ता मार्क डी. सिलिंस्क के अनुसार, अयातुल्ला खुमैनी ने एक ऐसे संगठन की कल्पना की थी जो केवल सैन्य उद्देश्यों के लिए नहीं, बल्कि इस्लामिक विचारों की रक्षा के लिए काम करेगा। खुमैनी का मुख्य मकसद युवाओं को इन कट्टर विचारों से जोड़ना था ताकि ईरान की सत्ता को सुरक्षित रखा जा सके। वर्तमान में, आधिकारिक तौर पर इसके पास 1.5 लाख जवान हैं लेकिन इसके वॉलंटियर्स की संख्या 2 करोड़ से भी अधिक बताई जाती है।

दुनिया के सुपरपावर आखिर क्यों डरते हैं?

ब्रिटिश संसद की एक रिपोर्ट के अनुसार, आईआरजीसी का मुख्य कार्य दुनिया भर में लोगों को कट्टर बनाकर इस्लामिक विचारधारा फैलाना है, जिसे यूरोप और अमेरिका अपने लिए एक बड़ा खतरा मानते हैं। इसके खतरनाक होने के पीछे कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

प्रॉक्सी संगठनों का जाल

1990 के दशक में ईरान ने मिडिल ईस्ट से पश्चिमी देशों के वर्चस्व को खत्म करने के लिए हूती, हिजबुल्ला, कताइब और हमास जैसे प्रॉक्सी संगठन तैयार किए। इन संगठनों के जरिए आईआरजीसी ने अमेरिका और यूरोप समर्थित देशों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

ऊर्जा और व्यापार पर नियंत्रण

मिडिल ईस्ट दुनिया का सबसे बड़ा तेल और ऊर्जा भंडार है। आईआरजीसी की सक्रियता की वजह से इस महत्वपूर्ण व्यापारिक जंक्शन पर अमेरिका अपना दबदबा कायम नहीं रख पा रहा है।

अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाना

साल 2001 के बाद इराक और अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना को पीछे हटने पर मजबूर करने में इस संगठन की बड़ी भूमिका रही है। उस समय इसकी कमान कासिम सुलेमानी के हाथों में थी जिन्होंने इसे और भी घातक बनाया।

ट्रंप पर हमले के आरोप

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि आईआरजीसी के एजेंट अमेरिका में भी सक्रिय हैं। 2024 में डोनाल्ड ट्रंप पर हुए हमले के लिए भी ईरान और इस संगठन को जिम्मेदार माना गया था। कुल मिलाकर, आईआरजीसी को एक ऐसी ताकत के रूप में देखा जाता है जो न केवल मिडिल ईस्ट की स्थिरता बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बनी हुई है।

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