रोजी-रोटी से शुरू आंदोलन बना बगावत, PoK में जारी हिंसा से बेनकाब हुई पाक सरकार और मुनीर सेना
JAAC Protests In PoK: पीओके में हिंसा और विरोध प्रदर्शन तेज हो गई है। JAAC के आंदोलन, पाकिस्तान के दमन, CPEC परियोजनाओं और स्थानीय लोगों की नाराजगी ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
- Written By: अमन मौर्या
पाकिस्तानी फ्लैग (सोर्स- IANS)
Pakistan Crackdown In PoK: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बीते कुछ दिनों में भीषण हिंसा और आगजनी देखने को मिल रही है। पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई में स्थानीय लोगों की मौत भी हुई है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हाल की अशांति ने एक बार फिर इस्लामाबाद के साथ इस इलाके के खराब संबंध को सबके सामने ला दिया है। पीओके में बीते कई हफ्तों से चल रहे प्रदर्शनों, गिरफ्तारियों और पाबंदियों का नतीजा प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक टकराव के रूप में सामने आया है।
सरकार की तरफ से बार-बार कम्युनिकेशन नेटवर्क को अलग किया गया, प्रदर्शन करने वाले लोगों पर लाठी-डंडे बरसाए गए, उन्हें विरोध प्रदर्शन करने से रोका गया और बड़े स्तर पर सेना ने बल का प्रयोग किया। हालांकि, इन पूरे हालात में यह बात स्पष्ट है कि यह टकराव और गुस्सा किसी एक कारण से नहीं है।
संसाधनों तक पहुंच को लेकर बढ़ा टकराव
इस आंदोलन के केंद्र में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) है। यह व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और सिविल सोसाइटी समूहों का एक गठबंधन है जो बिजली टैरिफ, खाद्य पदार्थों की कीमतों से लेकर सरकारी सुविधाओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक की मांगों को लेकर एकजुट हुआ है।
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यह आंदोलन मुख्य रूप से कश्मीर को लेकर भारत-पाकिस्तान के पारंपरिक टकराव से नहीं उभरा बल्कि यह रोजमर्रा के शासन और संसाधनों तक पहुंच के सवालों के इर्द-गिर्द बढ़ा है। इस्लामाबाद का बढ़ता दमनकारी रवैया अब इन शिकायतों को सुरक्षा के दायरे में धकेल रहा है, जिससे राजनीतिक बातचीत की गुंजाइश और कम हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुली पाकिस्तान की पोल
अंतरराष्ट्रीय स्तरों पर भी पाकिस्तान ने लंबे समय से खुद को इलाके के राजनीतिक अधिकारों और खुद के फैसले का सबसे बड़ा हिमायती बताने की पूरी कोशिश की है। हालांकि, वर्तमान समय में जो हालात बने हैं, उसने लोगों की नाराजगी और गुस्से को सबके सामने लाकर रख दिया। यह पाकिस्तान के लिए खास तौर पर असहज करने वाला है। यह इलाका इस्लामाबाद के इंफ्रास्ट्रक्चर के लक्ष्यों और चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के जरिए, इस इलाके में बीजिंग की आर्थिक मौजूदगी में भी तेजी से जुड़ रहा है।
सीपीईसी से स्थानीयों में बढ़ी नाराजगी
इसलिए, मौजूदा अशांति एक बड़ी उलझन को सामने लाती है। इंफ्रास्ट्रक्चर किसी इलाके की आर्थिक और रणनीतिक मूल्यों को बढ़ा सकता है, बिना यह तय किए कि उस वैल्यू का इस्तेमाल कैसे किया जाए और बिना वहां के लोगों को कोई बड़ी भूमिका दिए।
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इस इलाके से होकर बहने वाली झेलम नदी ने पीओके को पाकिस्तान के ऊर्जा प्लान के लिए जरूरी बना दिया है जबकि चीनी निवेश ने इस अहमियत में एक और पहलू जोड़ दिया है। सीपीईसी के तहत, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स ने इस इलाके को इस्लामाबाद और बीजिंग के बीच बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर साझेदारी में शामिल कर लिया है।
एजेंसी इनपुट के साथ…
