पाकिस्तान में भारी बारिश, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
Pakistan KP Rain Building Collapse: पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा (KP) में कुदरत का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश और तूफान ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। गुरुवार को आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रांत के विभिन्न जिलों में बारिश से संबंधित हादसों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और 14 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू 1122 के अनुसार, सबसे दुखद घटना पेशावर के मट्टानी इलाके में हुई, जहां भारी बारिश के कारण एक घर की छत ढह गई। इस मलबे में दबने से एक मासूम बच्चे की मौत हो गई और दो अन्य लोग घायल हो गए। वहीं, नौशेरा के रहीमाबाद इलाके में भी एक घर की छत गिर गई, जिसमें एक ही परिवार के तीन सदस्य दो बच्चे और एक महिला मलबे में दबकर घायल हो गए। घायलों को तत्काल इलाज के लिए पब्बी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मोहमंद जिला इस बार प्राकृतिक आपदा का मुख्य केंद्र बना हुआ है। जिले में भारी बारिश ने पिछले 13 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2026 में यहां 151 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो 2013 में दर्ज की गई 134 मिलीमीटर के पुराने रिकॉर्ड से कहीं अधिक है। इस रिकॉर्ड बारिश की वजह से मोहमंद के शहीद बांदा इलाके में एक घर ढहने से एक लड़की की मौत हो गई जबकि सरा खावा इलाके में एक कमरे की छत गिरने से एक पुरुष की जान चली गई।
प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (PDMA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च के अंत से शुरू हुई इस तबाही में अब तक कुल 45 लोगों की मौत हो चुकी है और 105 लोग घायल हुए हैं। मरने वालों में 23 बच्चे और 5 महिलाएं शामिल हैं, जो इस आपदा की विभीषिका को दर्शाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रांत भर में कुल 442 घरों को नुकसान पहुंचा है जिनमें से 60 घर पूरी तरह से जमींदोज हो गए हैं।
यह भी पढ़ें:- ईरान युद्ध की आड़ में रूस का बड़ा खेल? ब्रिटेन ने पुतिन की ‘साजिश’ का किया पर्दाफाश; जानें क्या था मामला
पाकिस्तान में बारिश का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है। निचले इलाकों में पानी भर जाने और नालों के उफान पर आने से सैकड़ों लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। सड़कों के बह जाने से कई इलाके मुख्य संपर्क मार्गों से कट गए हैं, जिससे राहत कार्यों में बड़ी बाधा आ रही है। इसके अलावा, मवेशियों की मौत और बड़े पैमाने पर फसलों की बर्बादी ने किसानों को भारी आर्थिक संकट में डाल दिया है।