ईरान-अमेरिका सीजफायर पर मचा बवाल! पाकिस्तान की भूमिका पर भड़का UAE, लगाया 'धोखे' का बड़ा आरोप

Iran Us Ceasefire UAE Angry Pakistan: ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम से दुनिया भर में जश्न है, लेकिन यूएई ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर गहरी नाराजगी जताते हुए इसे अपने हितों के खिलाफ बताया है।
Uproar Over Iran-US Ceasefire! UAE Outraged by Pakistan's Role, Levels Major Accusation of 'Deception'
मोजतबा खामेनेई, शहबाज शरीफ और मोहम्मद बिन जायद, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Iran Us Ceasefire UAE Angry Pakistan Role: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच घोषित युद्धविराम (Ceasefire) ने जहां वैश्विक स्तर पर राहत और खुशी की लहर दौड़ाई है, वहीं एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शक्ति संयुक्त अरब अमीरात (UAE) इस घटनाक्रम से गहरा नाराज नजर आ रहा है।

ताज्जुब की बात यह है कि यूएई की इस नाराजगी के केंद्र में ईरान से ज्यादा पाकिस्तान की भूमिका है। दरअसल, पाकिस्तान ने इस पूरी सीजफायर प्रक्रिया में एक 'मैसेंजर' या मध्यस्थ की भूमिका निभाई है, जिसे यूएई अपनी रणनीतिक उपेक्षा के तौर पर देख रहा है।

पाकिस्तान की भूमिका

यूएई (UAE) के विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं का मानना है कि पाकिस्तान ने सीजफायर की पूरी प्रक्रिया में अमीरात को विश्वास में नहीं लिया। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने केवल अमेरिका के निर्देशों पर काम किया और इस प्रक्रिया में यूएई के हितों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। विशेषज्ञों ने इसे एक 'धोखा' करार दिया है क्योंकि सीजफायर के आधिकारिक संदेशों में भी यूएई का कहीं जिक्र नहीं किया गया जबकि इस युद्ध में सबसे अधिक भौतिक और मानवीय नुकसान यूएई को ही उठाना पड़ा है।

हमलों का घाव और सुरक्षा की चिंता

यूएई की नाराजगी का एक बड़ा कारण युद्ध के दौरान उस पर हुए भीषण हमले हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जंग के दौरान ईरान ने यूएई के प्रमुख शहरों दुबई, शारजाह और अबू धाबी पर 2 हजार से ज्यादा हमले किए। अमीरात के रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में ही यूएई पर 2200 ड्रोन, 500 बैलिस्टिक मिसाइलों और 26 क्रूज मिसाइलों से प्रहार किया गया, जिसमें 10 अमीराती नागरिकों की जान चली गई। अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि यदि ईरान भविष्य में दोबारा हमले करता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा क्योंकि सीजफायर की शर्तों में इसकी स्पष्ट गारंटी नहीं दी गई है।

UAE के हितों के विपरीत

रणनीतिक मोर्चे पर भी यूएई खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। Strait of Hormuz को लेकर जो समझौता हुआ है उसे यूएई के हितों के विपरीत माना जा रहा है। पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र (UN) में वोटिंग से खुद को अलग रखा और बाद में डील के दौरान ईरान की शर्तों को स्वीकार कर लिया जो यूएई के लिए एक बड़ा राजनयिक झटका है। यूएई लंबे समय से होर्मुज पर नियंत्रण के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य बल की वकालत कर रहा था लेकिन यह योजना सफल नहीं हो सकी।

भविष्य की आशंकाएं

यूएई-ईरान के बीच तनाव कोई नया नहीं है दोनों देशों के बीच 1905 से ही फारस की खाड़ी के तीन द्वीपों को लेकर क्षेत्रीय विवाद चल रहा है। हालिया युद्ध के दौरान यूएई ने न केवल सैन्य मोर्चे पर तैयारी की थी बल्कि ईरानी नागरिकों पर प्रतिबंध लगाकर ईरान के शासन को कमजोर करने की भी कोशिश की थी। अब सीजफायर के बाद पाकिस्तान और ईरान की बढ़ती नजदीकी और यूएई की उपेक्षा ने क्षेत्र में एक नए कूटनीतिक ध्रुवीकरण की संभावना पैदा कर दी है।

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