पाकिस्तान के किराना हिल्स हमले का मामला गरमाया, US ने भेजी जांच टीम? दुनिया भर में मचा हड़कंप
पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में अमेरिकी बीचक्राफ्ट बी350 एरियल मेजरिंग सिस्टम (AMS) विमान को देखा। यह विमान, जिसका टेल नंबर N111SZ है, अमेरिकी ऊर्जा विभाग के बेड़े का हिस्सा है और इसे रेडियोधर्मी रिसाव का पता लगाने के लिए..
- Written By: अमन उपाध्याय
किराना हिल्स हमले का मामला गरमाया, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
वॉशिंगटन: भारत ने उन सभी रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया है, जिनमें यह कहा गया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के संवेदनशील परमाणु स्थलों पर बमबारी की गई थी। हालांकि, सोशल मीडिया पर कई विशेषज्ञ बार-बार यह दावा कर रहे हैं कि भारत ने किराना हिल्स को निशाना बनाया था, जहां पाकिस्तान अपने परमाणु वारहेड्स रखता है या जहां उसका न्यूक्लियर ठिकाना स्थित है।
यह भी कहा जा रहा है कि भारत की बमबारी के बाद रेडियोएक्टिव रिसाव हुआ है, और अमेरिका ने इस साइट की रेडिएशन जांच के लिए अपने विमान को वहां भेजा है। इस पर अब अमेरिका ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है, और पहली बार विदेश विभाग ने इस मामले पर बयान जारी किया है।
किराना हिल्स पर कोई हमला नहीं
एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान 12 मई को भारत के एयर ऑपरेशंस के महानिदेशक, एयर मार्शल ए.के. भारती ने स्पष्ट किया कि हमने किराना हिल्स पर कोई हमला नहीं किया है। इस दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए यह भी कहा कि हमें यह बताने के लिए धन्यवाद कि किराना हिल्स में परमाणु प्रतिष्ठान हैं, हमें इस बारे में जानकारी नहीं थी। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर और भी हलचल मचा दी।
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जब अमेरिकी विदेश विभाग से यह सवाल किया गया कि क्या अमेरिकी टीम पाकिस्तान में परमाणु विकिरण लीक की जांच करने के लिए भेजी गई है, तो प्रवक्ता ने कहा कि मेरे पास इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उनका यह बयान स्पष्ट रूप से यह संकेत दे रहा था कि इस प्रकार का कोई मामला नहीं है जिसे जांचा जाए। यह कहते हुए अमेरिका ने न्यूक्लियर रेडिएशन लीक से संबंधित खबरों का खंडन कर दिया है।
यह अफवाहें तब फैलनी शुरू हुईं जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत कई पाकिस्तानी एयरबेसों पर सटीक हवाई हमले किए, जिनमें सरगोधा और नूर खान एयरबेस भी शामिल थे। ये दोनों स्थान पाकिस्तान के परमाणु-संबंधित बुनियादी ढांचे के पास स्थित हैं। रावलपिंडी में स्थित नूर खान एयरबेस पाकिस्तान के न्यूक्लियर कमांड सेंटर से कुछ ही किलोमीटर दूर है और यहां से पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रमों का प्रबंधन किया जाता है। वहीं, सरगोधा एयरबेस, जहां भारत ने हमला किया था, किराना हिल्स से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां मुशफ़ एयरबेस है, जहां से पाकिस्तान अपने F-16 और JF-17 लड़ाकू विमानों को ऑपरेट करता है।
पूर्व CIA अधिकारी ने किया दावा
ऐसे में किराना हिल्स पर हमले के दावे को सिर्फ अफवाह माना जा सकता है। भारत और पाकिस्तान दोनों ने अब तक किराना हिल्स पर हमले के दावे को खारिज किया है। जबकि रैंड कॉर्पोरेशन के विशेषज्ञ और पूर्व CIA अधिकारी डेरेक ग्रॉसमैन ने यह दावा किया है कि भारत के नूर खान एयरबेस पर हमले के कारण “पाकिस्तान की परमाणु कमान को खतरा हुआ” और “रेडियोधर्मी रिसाव” हुआ। हालांकि, उनकी इन टिप्पणियों को न तो भारत और न ही अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है।
पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में बी350 विमान देखा गया
यह अफवाहें तब और बढ़ गईं, जब पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में अमेरिकी बीचक्राफ्ट बी350 एरियल मेजरिंग सिस्टम (AMS) विमान को देखा। यह विमान, जिसका टेल नंबर N111SZ है, अमेरिकी ऊर्जा विभाग के बेड़े का हिस्सा है और इसे रेडियोधर्मी रिसाव का पता लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह विमान गामा-रे सेंसर और रियल-टाइम मैपिंग टूल से लैस होता है और इसका उपयोग पहले भी फुकुशिमा जैसे घटनाओं के बाद किया गया है। इस विमान की कथित उपस्थिति से यह सवाल उठने लगे कि क्या इसे पाकिस्तान में रेडियोधर्मी तत्वों के रिसाव की जांच करने के लिए भेजा गया है?
जांच की नहीं की गई कोई मांग
हालांकि, पाकिस्तान के पास भी ऐसा ही एक एयरक्राफ्ट है, जिसे अमेरिका ने उसे सौंपा है, और कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि वह अमेरिकी नहीं, बल्कि पाकिस्तानी विमान था, जिसे परमाणु प्रतिक्रिया के लिए तैयार किया गया था। इसलिए, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वह विमान अमेरिकी था या पाकिस्तानी। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस अफवाह को खारिज किया है। पाकिस्तान ने अब तक परमाणु हथियारों और परमाणु कार्यक्रमों की निगरानी करने वाली अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों से आधिकारिक तौर पर जांच की कोई मांग नहीं की है।
