भारत और पाकिस्तान के बीच जल संधि। इमेज-एआई
India and Pakistan News: पाकिस्तान ने कहा है कि सिंधु नदी जल समझौते (IWT) के तहत उसे मिली पश्चिमी नदियों पर भारत किसी तरह की गतिविधि या नियमों का उल्लंघन करती है तो वह उसे नई दिल्ली के साथ राजनीतिक एवं कूटनीतिक स्तर पर उठाएगा। गुरुवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने यह भी कहा कि सिंधु नदी जल समझौते एक बाध्यकारी व्यवस्था बना हुआ है। इस संधि को रोकने का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, इस पर अब तक भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
बता दें, बीते साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के एक दिन बाद यानी 23 अप्रैल 2025 को भारत ने पाकिस्तान को सजा देने वाले कई प्रतिबंधात्मक कदम उठाए थे। इसमें 1960 के सिंधु नदी जल समझौते को स्थगित करना भी शामिल था। विश्व बैंक की तरफ से कराए गए सिंधु नदी जल समझौते ने 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी उप नदियों के बंटवारे और इस्तेमाल को नियंत्रित किया हुआ है।
सिंधु जल समझौते (1960) के तहत भारत को रावी, ब्यास और सतलुज (पूर्वी नदियां) मिलीं हैं। इन नदियों का भारत पूरा उपयोग कर सकता है। वहीं, पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब (पश्चिमी नदियां) मिली हैं। इनके 80% पानी का वह उपयोग करता है। इसमें भारत पश्चिमी नदियों पर सीमित बिजली परियोजनाएं बना सकता है। इससे यह विश्व के सबसे सफल जल साझाकरण समझौतों में से एक माना जाता है।
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पाकिस्तान पिछले दिनों जल संधि को बहाल करने के लिए भारत से कई बार अनुरोध कर चुका है। उसने कई बार पत्र लिखे, लेकिन भारत अपने रुख पर अड़ा हुआ है। जम्मू-कश्मीर की पनबिजली परियोजनाओं पर वह तेजी से आगे बढ़ रहा। पाकिस्तान को ऐसी आशंका है कि उसके हिस्से वाले नदियों पर परियोजनाओं पर काम शुरू होने से उसके हिस्से के जल प्रवाह में कमी या वह प्रभावित हो सकता है। इस कारण वह बार-बार इस संधि को बहाल करने की मांग कर रहा है। पाकिस्तान की खेती का बड़ा हिस्सा संधि नदी के जल से सिंचित होता है।