‘मनमानी हिरासत और उत्पीड़न’ का आरोप, पाकिस्तान में पत्रकार मामले पर मानवाधिकार परिषद ने जताई चिंता
Pakistani Journalist Detained: पाकिस्तान की मानवाधिकार परिषद ने पत्रकार सोहराब बरकत की कथित मनमानी हिरासत और जबरन गायब किए जाने पर चिंता जताते हुए इसे प्रेस स्वतंत्रता पर हमला बताया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
पाकिस्तान में प्रेस स्वतंत्रता पर हमला, फोटो (सो. आईएएनएस)
Pakistan News In Hindi: पाकिस्तान की मानवाधिकार परिषद (एचआरसी पाकिस्तान) ने पत्रकार सोहराब बरकत की जारी हिरासत, कथित जबरन गायब किए जाने और न्यायिक उत्पीड़न पर गहरी चिंता व्यक्त की है। परिषद का कहना है कि यह मामला न सिर्फ एक पत्रकार के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि देश में प्रेस की स्वतंत्रता, विधिक प्रक्रिया और संवैधानिक सुरक्षा की स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
एचआरसी के अनुसार, इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तानी समाचार माध्यम ‘सियासत’ के संवाददाता सोहराब बरकत को 26 नवंबर को उस समय हिरासत में लिया गया, जब वह संयुक्त राष्ट्र के एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से यात्रा करने वाले थे। परिषद का दावा है कि हिरासत के बाद उन्हें अवैध रूप से लाहौर स्थानांतरित किया गया और उनके खिलाफ एक के बाद एक कई मामले दर्ज किए गए।
शासन के प्रति चिंताजनक
परिषद ने बताया कि इससे पहले इस्लामाबाद हाईकोर्ट में आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया गया था कि सोहराब बरकत के खिलाफ कोई जांच या आपराधिक मामला लंबित नहीं है और वह स्वतंत्र रूप से यात्रा कर सकते हैं। इसके बावजूद, अदालत में दिए गए बयानों और बाद में की गई कार्रवाइयों के बीच स्पष्ट विरोधाभास देखने को मिला जिसे एचआरसी ने कानून के शासन के प्रति चिंताजनक उपेक्षा बताया है।
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पत्रकारिता के वैध और संरक्षित दायरे
मानवाधिकार परिषद का कहना है कि बरकत पर लगाए गए सभी आरोप उनके पेशेवर पत्रकारिता कार्य से जुड़े हैं। इनमें साक्षात्कार करना, समाचार सामग्री का संपादन और प्रकाशन, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग तथा राजनीतिक असहमति और मानवाधिकार मुद्दों की कवरेज शामिल है। परिषद ने स्पष्ट किया कि ये सभी गतिविधियां पत्रकारिता के वैध और संरक्षित दायरे में आती हैं और इन्हें अपराध के रूप में देखना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
अहम चरणों पर नए मामलों का सामने
एचआरसी ने यह भी आरोप लगाया कि सोहराब बरकत को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में लिया गया अदालत में पेश करने में देरी की गई और स्पष्ट व ठोस आरोपों के अभाव में उन्हें बार-बार रिमांड पर भेजा गया। इसके साथ ही, उन्हें अपने परिवार और कानूनी सलाहकार से पर्याप्त संपर्क का अवसर नहीं दिया गया। परिषद के अनुसार, कानूनी प्रक्रिया के अहम चरणों पर नए मामलों का सामने आना जमानत में बाधा डालने और हिरासत को लंबा करने की रणनीति जैसा प्रतीत होता है।
दायित्वों का सम्मान करने का आह्वान
मानवाधिकार परिषद ने सोहराब बरकत की तत्काल रिहाई, उनके खिलाफ दर्ज सभी कथित मनगढ़ंत और राजनीतिक रूप से प्रेरित मामलों को वापस लेने, तथा उनकी कथित अगवा करने और हिरासत के दौरान हुए व्यवहार की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की है। साथ ही, पाकिस्तानी अधिकारियों से पत्रकारों को निशाना बनाने और डराने की नीति समाप्त करने तथा संविधान और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का सम्मान करने का आह्वान किया गया है।
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परिषद ने जोर देकर कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रेस किसी भी लोकतांत्रिक समाज की बुनियाद होता है। सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करना और बिना भय के जनता को सूचित करना पत्रकारों का कर्तव्य है। पत्रकारिता को अपराध बनाना लोकतंत्र, जवाबदेही और मानवीय गरिमा को कमजोर करता है।
(आईएएनएस इनपुट के साथ)
