धड़ल्ले से ईरानी रियाल खरीद रहे पाकिस्तानी… देख रहे रातों-रातों अंबानी बनने का सपना, जानें क्या है पूरा खेल
Pakistan News: पाकिस्तान के कराची में ईरानी रियाल खरीदने की होड़ मची है। निवेशक अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद में भारी मात्रा में मुद्रा जुटा रहे हैं, जिसे विशेषज्ञ बड़ा जोखिम मान रहे हैं।
- Written By: अक्षय साहू
पाकिस्तान में बढ़ी ईरानी रियाल की मांग (कांसेप्ट फोटो, सौ- सोशल मीडिया)
Pakistani Investors Buying Iranian Rial: पाकिस्तान में इन दिनों ईरानी मुद्रा खरीदने का चलन तेजी से बढ़ रहा है, खासकर कराची के व्यापारियों के बीच। बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि ईरानी रियाल में रुचि पहले भी थी, लेकिन हाल के भू-राजनीतिक तनाव खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बाद इसमें अचानक तेजी आई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आम निवेशक इस उम्मीद में रियाल खरीद रहे हैं कि भविष्य में यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता होता है और आर्थिक प्रतिबंधों में ढील मिलती है, तो इस मुद्रा की कीमत बढ़ सकती है। इतिहास भी इसका संकेत देता है। 2015 में जब Iईरान परमाणु समझौता 2015 हुआ था, तब ईरानी मुद्रा में कुछ मजबूती आई थी। हालांकि 2018 में समझौता टूटने के बाद इसकी कीमत फिर तेजी से गिर गई।
डॉलर से मजबूत था ईरानी रियाल
ईरानी रियाल का लंबा इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। कभी एक डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत बेहद मजबूत थी, लेकिन समय के साथ यह तेजी से कमजोर होती गई। आज स्थिति यह है कि बड़ी मात्रा में रियाल खरीदने के बावजूद उसकी वास्तविक कीमत काफी कम है। यही वजह है कि छोटे निवेशकों को कम पैसे में लाखों-करोड़ों रियाल मिल जाते हैं, जो उन्हें आकर्षित करता है।
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रिपोर्ट्स के अनुसार, कई लोग सोशल मीडिया और व्यक्तिगत सलाह के आधार पर इस मुद्रा में निवेश कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, कराची के एक व्यापारी ने लगभग 40,000 पाकिस्तानी रुपये में 40 मिलियन रियाल खरीद लिए, यह सोचकर कि भविष्य में इसकी कीमत बढ़ सकती है।
ईरानी रियाल खरीदने में जोखिम
हालांकि विशेषज्ञ इस तरह के निवेश को जोखिम भरा मानते हैं। पाकिस्तान एक्सचेंज कंपनीज एसोसिएशन के अध्यक्ष मलिक बोस्तान के अनुसार, यह बिल्कुल तय नहीं है कि रियाल की कीमत बढ़ेगी ही। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो इसकी वैल्यू और गिर सकती है।
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सबसे बड़ा खतरा यह भी है कि ईरान अपनी पुरानी मुद्रा प्रणाली में बदलाव कर सकता है या नई मुद्रा जारी कर सकता है। ऐसी स्थिति में पुराने नोट बेकार हो सकते हैं, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके बावजूद, कुछ लोग इसे “हाई-रिस्क, हाई-रिटर्न” के तौर पर देख रहे हैं। साथ ही पाकिस्तान और ईरान के बीच व्यापार और धार्मिक यात्राओं में भी इस मुद्रा का सीमित उपयोग होता है।
