अमेरिका से बातचीत समय की बर्बादी...ईरान ने ट्रंप के अरमानों पर फेरा पानी, पाकिस्तान के जरिए भेजा दो टूक जवाब

US-Iran War: ईरान ने इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है। ईरान ने अमेरिकी मांगों और समुद्री नाकेबंदी को देखते हुए इस वार्ता को ‘समय की बर्बादी’ करार दिया है।
Iran Refuses to Negotiate With US
ईरान ने अमेरिका से बातचीत को समय की बर्बादी करार दिया कहा (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Iran Refuses to Negotiate With US: ईरान (Iran) की अर्द्ध सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने ईरानी सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान ने अमेरिका को औपचारिक रूप से सूचित कर दिया है कि वह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली प्रस्तावित बातचीत में शामिल नहीं होगा। ईरान का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में यह वार्ता ‘समय की बर्बादी’ होगी।

फारसी भाषा में जारी रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी वार्ता दल ने पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिकी पक्ष को साफ संदेश दे दिया है कि वह बुधवार को इस्लामाबाद में मौजूद नहीं रहेगा और फिलहाल बातचीत में शामिल होने की कोई संभावना नहीं है।

अमेरिका की मांगे बनी पीछे हटने की वजह

सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले के पीछे कई कारण बताए गए हैं। इनमें लेबनान में हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच जारी संघर्ष को शामिल करने के लिए युद्धविराम को आगे बढ़ाने में अमेरिका की कथित विफलता, शांति वार्ता के दौरान ‘अत्यधिक अमेरिकी मांगें’ और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौसैनिक नाकेबंदी शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कई दिनों से दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी था, लेकिन अमेरिकी पक्ष अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं दिखा और बातचीत में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी। इसी कारण ईरान (Iran) ने यह निष्कर्ष निकाला कि मौजूदा हालात में बातचीत में शामिल होना किसी भी तरह से उपयोगी नहीं होगा और इसे समय की बर्बादी माना जाएगा।

ट्रंप ने बढ़ाई सीजफायर की समयसीमा

ईरान (Iran) के इस रुख को अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्धविराम को आगे बढ़ाने की घोषणा की थी। यह सीजफायर 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला था, और ट्रंप को उम्मीद थी कि इस दौरान दोनों देशों के बीच किसी समझौते की दिशा में प्रगति होगी।

हालांकि, इस्लामाबाद में प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता को लेकर ईरान की ओर से स्पष्ट संकेत न मिलने पर अमेरिका ने युद्धविराम को आगे बढ़ाने का फैसला किया। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सरकार और सेना के बीच मतभेद हैं, जिसके कारण उसे अतिरिक्त समय दिया जा रहा है ताकि वह समझौते पर विचार कर सके। वहीं, ईरान ने ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। 

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