
पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा पर संकट (सोर्स-सोशल मीडिया)
Secondary education for girls: पाकिस्तान में माध्यमिक स्तर पर लड़कियों की शिक्षा प्रणाली को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है जिसमें सरकार की नाकामियों को उजागर किया गया है। मलाला फंड पाकिस्तान के मुताबिक, कक्षा 5 पूरी करने के बाद लड़कियों को एक ऐसी ‘अदृश्य दीवार’ का सामना करना पड़ता है जिसे पार करना उनके लिए कठिन है। शिक्षा की यह स्थिति केवल बुनियादी साक्षरता तक सीमित रह गई है, जिससे लड़कियों के पास भविष्य के लिए कोई विकल्प नहीं बचते हैं। पाकिस्तान की आधी आबादी को किशोरावस्था में पीछे छोड़ देना राष्ट्र की सफलता के मार्ग में एक बड़ी बाधा बन गया है।
निशात रियाज़ ने कहा कि पाकिस्तान की लड़कियों में सीखने की प्रबल भूख है और वे बाढ़ जैसी आपदाओं का सामना कर स्कूल पहुंचती हैं। लेकिन दुर्भाग्य से पाकिस्तान का वर्तमान सिस्टम उन्हें आधे रास्ते में ही रोक देता है और प्रशासन इसे ही अपनी बड़ी सफलता मान लेता है। प्राथमिक स्कूल के बाद दूरस्थ विद्यालय, असुरक्षित परिवहन और पुरुष प्रधान स्टाफ उनकी शिक्षा की राह में सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरते हैं।
अक्सर देश में नए स्कूल भवनों और मुस्कुराती लड़कियों की तस्वीरों के साथ शिक्षा की शुरुआत का जश्न बड़े स्तर पर मनाया जाता है। हालांकि नई रिपोर्ट बताती है कि लड़कियां आत्मविश्वास के साथ स्कूल शुरू करती हैं, लेकिन किशोरावस्था तक आते-आते वे कक्षाओं से गायब हो जाती हैं। सच्चाई यह है कि वे खुद ड्रॉपआउट नहीं होतीं, बल्कि व्यवस्था और सामाजिक दबाव के कारण उन्हें स्कूल से बाहर कर दिया जाता है।
पाकिस्तान में नामांकन की समस्या से बड़ी चुनौती शिक्षा में निरंतरता की कमी है, क्योंकि प्राथमिक के मुकाबले माध्यमिक स्कूल बहुत कम हैं। मिडिल और सेकेंडरी स्कूलों की दूरी लड़कियों के लिए इतनी अधिक होती है कि वहां तक पैदल पहुंचना उनके लिए लगभग असंभव हो जाता है। दूरी के कारण सुरक्षा संबंधी चिंताएं, गरीबी और सामाजिक अपेक्षाएं मिलकर शिक्षा के संवैधानिक वादे को महज दस वर्ष की आयु में खत्म कर देती हैं।,
वर्तमान प्रणाली लड़कियों को केवल बुनियादी साक्षरता प्रदान कर रही है, जिससे वे पढ़ तो सकती हैं लेकिन नेतृत्व करने की क्षमता विकसित नहीं कर पातीं। लड़कियों को केवल आदेशों का पालन करना सिखाया जाता है, जबकि माध्यमिक शिक्षा उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की ताकत देती है। प्राथमिक शिक्षा को पर्याप्त मान लेना एक अन्याय है, क्योंकि एक शिक्षित लड़की ही समाज में बदलाव लाने और विकल्प चुनने की क्षमता रखती है।
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पाकिस्तान में माध्यमिक शिक्षा की बिगड़ती स्थिति देश की आधी आबादी को किशोरावस्था के महत्वपूर्ण समय में पीछे छोड़ने जैसा गंभीर मानवीय संकट है। कोई भी राष्ट्र तब तक पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकता जब तक उसकी लड़कियां शिक्षा और विकास के मार्ग से पूरी तरह दूर रहेंगी। अब समय आ गया है कि सरकार प्रतीकात्मक कदमों को छोड़कर ठोस और प्रणालीगत सुधारों की ओर बढ़े ताकि लड़कियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।






