तेल ही नहीं, अब थाली पर भी संकट; ईरान जंग से फर्टिलाइजर की सप्लाई ठप, दुनिया भर में 'अकाल' का खतरा बढ़ा

Iran War Food Crisis: ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक उर्वरक आपूर्ति संकट में है। भारत, ब्राजील और चीन जैसे देशों पर खाद्य असुरक्षा का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
Not Just Oil, Now the Dinner Plate Is Also Under Threat; Fertilizer Supplies Halted Due to the Iran War, Heightening the Risk of 'Famine' Worldwide.
ईरान युद्ध से वैश्विक खाद्य संकट बढ़ा, एआई फोटो
Published on
Updated on

Iran War Fertilizer Shortage Impact: पश्चिम एशिया में जारी भीषण जंग अब केवल ऊर्जा संकट तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि यह एक वैश्विक खाद्य संकट की ओर बढ़ रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है उसे ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) द्वारा 'बंद' घोषित किए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसके समानांतर एक और गंभीर संकट उर्वरकों की भारी कमी के रूप में उभर रहा है जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।

दुनिया की 'उर्वरक टोकरी' पर प्रहार

पूरी दुनिया के कुल व्यापारिक यूरिया का लगभग आधा हिस्सा और अन्य महत्वपूर्ण उर्वरकों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए निर्यात किया जाता है। दुनिया का 20 प्रतिशत उर्वरक और 46 प्रतिशत यूरिया इसी क्षेत्र से आता है। हालिया संघर्ष के कारण गैस आपूर्ति बाधित होने से कतर की सरकारी कंपनी 'कतर-एनर्जी' ने दुनिया के सबसे बड़े यूरिया प्लांट में उत्पादन रोक दिया है। कतर फर्टिलाइजर कंपनी अकेले दुनिया के 14 प्रतिशत यूरिया की आपूर्ति करती है, जिसका ठप होना वैश्विक कृषि के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।

भारत और ब्राजील जैसे देशों पर गहरा संकट

इस संकट का सबसे बुरा असर उन कृषि प्रधान देशों पर पड़ रहा है जो आयातित उर्वरकों पर निर्भर हैं। भारत अपनी यूरिया और फास्फेट जरूरतों का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी क्षेत्र से मंगवाता है। उर्वरक की कमी के कारण भारत ने पहले ही अपने तीन यूरिया प्लांट और बांग्लादेश ने अपने पांच में से चार कारखाने बंद कर दिए हैं। वहीं ब्राजील, जो दुनिया का सबसे बड़ा सोयाबीन निर्यातक है, अपने उर्वरकों के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है, जिसका आधा हिस्सा इसी युद्धग्रस्त मार्ग से आता है,।

आसमान छूती कीमतें और बुवाई का सीजन

यह व्यवधान ऐसे समय में आया है जब उत्तरी गोलार्ध में फसलों की बुवाई का मुख्य समय चल रहा है। मध्य पूर्व से यूरिया के निर्यात की कीमतें पिछले सप्ताह तक 40 प्रतिशत बढ़कर 700 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से ऊपर निकल गई हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि नाइट्रोजन उर्वरकों की कीमतें मौजूदा स्तर से दोगुनी और फास्फेट की कीमतें 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। अमेरिका में भी उर्वरक की आपूर्ति में 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

वैश्विक खाद्य असुरक्षा का डर

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि उर्वरक की कमी लंबी खिंची तो किसान इसका उपयोग करना बंद कर सकते हैं, जिससे चावल, गेहूं, मक्का और सोयाबीन जैसी मुख्य फसलों की पैदावार में भारी गिरावट आएगी। इससे न केवल वैश्विक स्तर पर खाद्यान्न की आपूर्ति कम होगी, बल्कि कीमतों में भी बेतहाशा वृद्धि होगी। इसी बीच, ईरान ने अपने खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब की मौत की पुष्टि की है और सऊदी अरब, कतर व यूएई के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी है, जिससे तनाव और बढ़ने की आशंका है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com