टूटने की कगार पर पहुंचा पाकिस्तान! PoK से बलूचिस्तान तक भड़की आग, कई मोर्चों पर घिरे आसिम मुनीर
PoK Protest: पाकिस्तान में गृह युद्ध जैसे हालात हैं। PoK में हिंसा, बलूचिस्तान में विद्रोह और टीटीपी के हमलों ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जानिए क्या है पूरा मामला।
- Written By: अमन उपाध्याय
आसिम मुनीर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
PoK Protest Latest News In Hindi: पाकिस्तान की चौतरफा घेराबंदी पाकिस्तान इन दिनों अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है, जहां आंतरिक और सीमाई मोर्चों पर एक साथ संकट गहरा गया है। एक तरफ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जनाक्रोश सड़कों पर है, तो दूसरी तरफ बलूचिस्तान में विद्रोह की आग तेज हो गई है।
उत्तर-पश्चिम में खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के बढ़ते हमले और अफगानिस्तान सीमा पर जारी तनाव ने सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के लिए ‘एंडगेम’ जैसी स्थिति पैदा कर दी है।
मुजफ्फराबाद की ओर लॉन्ग मार्च का ऐलान
PoK में उपजा हालिया विवाद तब शुरू हुआ जब वहां की सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा में 12 आरक्षित शरणार्थी सीटों को बरकरार रखने का निर्णय सुनाया। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि यह केवल संवैधानिक मुद्दा नहीं, बल्कि वर्षों से दबे गुस्से का विस्फोट है। लोग बिजली की बढ़ती कीमतों, आटे की भारी किल्लत और राजनीतिक अधिकारों के हनन को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
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स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने जॉइंट एक्शन कमेटी (JAC) के नेताओं को गिरफ्तार किया और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, झड़पों में अब तक 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हालात को संभालने के लिए 16,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने अब मुजफ्फराबाद की ओर एक बड़े ‘लॉन्ग मार्च’ का ऐलान कर दिया है।
POK ; Several caravans of protesters are continuing to arrive at the Joint Awami Action Committee (JAAC) protest site, with large numbers of women and children joining the protest. pic.twitter.com/NmywFWZ93W — (((Bharat)))™🚨🕉🚩🔱 🇮🇳 🇮🇱🇷🇺🇺🇸🎗 (@Topi1465795) July 15, 2026
बलूचिस्तान में विद्रोह की नई लहर
बलूचिस्तान में संकट के केंद्र में पानी की भारी कमी, कथित जबरन गुमशुदगी और बढ़ती हिंसा है। बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) के नेतृत्व में लापता लोगों के परिजन सड़कों पर हैं। रणनीतिक विशेषज्ञों का दावा है कि पाकिस्तान सरकार का नियंत्रण अब केवल बड़े शहरों तक सीमित रह गया है, जबकि ग्रामीण इलाकों में विद्रोही समूहों का प्रभाव बढ़ रहा है। बलूच विद्रोही लगातार सैन्य काफिलों और चीन के निवेश वाली परियोजनाओं, जैसे रेको डिक माइनिंग प्रोजेक्ट, को निशाना बना रहे हैं।
अफगान सीमा पर बढ़ता तनाव
तीसरा मोर्चा खैबर पख्तूनख्वा और अफगानिस्तान सीमा पर खुला हुआ है। यहां TTP के हमले सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं, जबकि अफगान तालिबान के साथ भी सीमा पर लगातार झड़पें हो रही हैं। पाकिस्तान को अपनी सेना और संसाधनों को पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दोनों दिशाओं में झोंकना पड़ रहा है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति और अधिक डगमगा गई है।
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भारत से तनाव बढ़ाने की साजिश?
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू मोर्चों पर विफल होने के बाद, पाकिस्तानी सेना जनता का ध्यान भटकाने के लिए भारत के साथ तनाव बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान ऐसा करता रहा है और अब वह सिंधु नदी के पानी को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की फिराक में है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जनरल आसिम मुनीर इन चारों मोर्चों की घेराबंदी से पाकिस्तान को कैसे बाहर निकालते हैं।
