पाकिस्तान में कांगो वायरस का खौफ: कराची में 17 साल के किशोर की मौत से मचा हड़कंप, ईद से पहले बढ़ी चिंता
Pakistan Congo Virus: कराची में कांगो वायरस से 17 साल के किशोर की मौत के बाद पाकिस्तान में अलर्ट जारी किया गया है। ईद-उल-अजहा से पहले आए इस साल के पहले मामले ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
- Written By: अमन उपाध्याय
सांकेतिक फोटो (सो. सोशल मिडिया)
Pakistan Congo Virus Alert: पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में जानलेवा ‘कांगो वायरस’ ने दस्तक दे दी है, जिससे पूरे देश के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को कराची के एक अस्पताल में इस वायरस से संक्रमित 17 वर्षीय किशोर की मौत हो गई।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, यह इस साल पाकिस्तान में कांगो वायरस से मौत का पहला पुष्ट मामला है। इस घटना ने विशेष रूप से इसलिए चिंता बढ़ा दी है क्योंकि अगले महीने ईद-उल-अजहा का त्योहार आने वाला है और इस मौके पर पशुओं की बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री होती है।
पशु फार्म में काम करता था किशोर
रिपोर्ट के अनुसार, मृतक किशोर एक पशु फार्म में काम करता था। उसे तेज बुखार की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया था। मरीज के खून के नमूने जांच के लिए आगा खान यूनिवर्सिटी अस्पताल भेजे गए थे, जहां रिपोर्ट में ‘क्रीमियन-कांगो हेमोरेजिक फीवर’ (CCHF) की पुष्टि हुई। संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उसे मंगलवार को विशेष संक्रामक रोग अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था, लेकिन इलाज के दौरान गुरुवार को उसकी मौत हो गई।
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क्या है कांगो वायरस ?
कांगो वायरस, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘क्रीमियन-कांगो हेमोरेजिक फीवर’ (CCHF) कहा जाता है यह एक कीट-जनित वायरल बीमारी है। यह इंसानों में गंभीर रक्तस्रावी बुखार (Hemorrhagic Fever) का कारण बनती है, जिसमें मृत्यु दर काफी अधिक होती है।
यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित ‘टिक्स’ (कीटों), विशेष रूप से ‘हयालोमा’ प्रजाति के कीटों के काटने से फैलता है। इसके अलावा, संक्रमित जानवरों के खून या ऊतकों (tissues) के सीधे संपर्क में आने से भी इंसान इसकी चपेट में आ सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने से एक इंसान से दूसरे इंसान में भी फैल सकता है जो इसे और भी खतरनाक बनाता है।
ईद-उल-अजहा को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
कराची के स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए यह मामला एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। अगले महीने होने वाली ईद-उल-अजहा के कारण कराची और उसके आसपास के इलाकों में बड़े-बड़े पशु बाजार लगने शुरू हो गए हैं। चूंकि अधिकांश जानवर ग्रामीण इलाकों से लाए जाते हैं, इसलिए टिक्स के जरिए संक्रमण फैलने का जोखिम बहुत अधिक रहता है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पशु विक्रेताओं के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिए हैं। पशु बाजारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्वास्थ्य मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और जानवरों की नियमित जांच करें।
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प्रशासन ने आम लोगों को भी सलाह दी है कि वे पशु मंडियों में जाते समय पूरी सावधानी बरतें और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें ताकि कीटों के काटने से बचा जा सके। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग संक्रमण के जोखिम का आकलन करने और इसे फैलने से रोकने के लिए कड़े कदम उठा रहा है।
