बर्बादी की कगार पर पाकिस्तान! खुद का देश हिंसा की आग में झुलस रहा, दुनिया में शांतिदूत बन रहे आसिम मुनीर
Pakistan Asim Munir: पाकिस्तान में बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में विद्रोह चरम पर है। सेना प्रमुख आसिम मुनीर दुनिया में शांतिदूत बन रहे हैं, जबकि BLA और TTP हमलों में हजारों मर रहे हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर (सोर्स-AI)
Pakistan Crisis Asim Munir: पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा की स्थिति इस समय बहुत ही ज्यादा खतरनाक और चिंताजनक हो चुकी है। देश के दो सबसे बड़े प्रांत बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में विद्रोह पिछले एक दशक के सबसे ऊंचे और खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। एक तरफ पूरा पाकिस्तान उग्रवादी हिंसा की भयंकर आग में पूरी तरह से जल रहा है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर दुनिया भर में घूमकर शांतिदूत बनने का दिखावा कर रहे हैं।
मुनीर इस्लामाबाद की जिहादी छवि को सुधारने में लगे हैं जबकि उनके अपने देश में खून-खराबा लगातार बढ़ रहा है। मई में जब जनरल मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता कराने में व्यस्त थे तब भयंकर हमले हुए। टीटीपी ने उस दौरान 37 बड़े हमले किए जिनमें 200 से ज्यादा बेगुनाह लोगों की दर्दनाक हत्या कर दी गई। यह पाकिस्तान की बाहरी दिखावे वाली छवि और उसकी असली आंतरिक सुरक्षा की कड़वी हकीकत को उजागर करता है।
चीनी राष्ट्रपति से बातचीत और हमला
25 मार्च को जब आसिम मुनीर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत कर रहे थे तब एक बहुत बड़ा और भयंकर हमला हुआ। बलूच अलगाववादियों ने सुरक्षाबलों की ट्रेन को बम से उड़ा दिया जिसमें 47 लोग मारे गए और दर्जनों अन्य घायल हो गए। बीएलए ने यह हमला जानबूझकर बीजिंग में जनरल मुनीर को पूरी तरह से शर्मिंदा करने के लिए किया था। बीएलए लगातार बलूचिस्तान में चीनी कर्मचारियों और वहां चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को अपना निशाना बना रही है।
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सीआरएसएस के चौकाने वाले डेटा के अनुसार साल 2025 में 1,272 उग्रवादी हमलों में 3,400 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। सैटपी की रिपोर्ट बताती है कि साल 2026 के शुरुआती 5 महीनों में ही मरने वालों का आंकड़ा 1,700 को पार कर चुका है। सुरक्षा बलों के बीच भी मौतों का आंकड़ा 2019 में 195 से बहुत तेजी से बढ़कर 2025 में 650 तक पहुंच गया है। पाकिस्तान का मुख्य फोकस बीएलए को खत्म करना है क्योंकि यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है।
चीनी नागरिकों पर लगातार होते हमले
नेकटा के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार बलूच अलगाववादियों ने 2021 और 2024 के बीच सीपीईसी प्रोजेक्ट्स को भारी निशाना बनाया। इन हमलों में करीब 20 चीनी नागरिकों की निर्मम हत्या कर दी गई और 34 अन्य लोग बहुत बुरी तरह घायल हुए। बीएलए का मुख्य मकसद विदेशी निवेश को रोकना और वहां के संसाधनों के हो रहे गलत दोहन का कड़ा विरोध करना है। पाकिस्तान ने 2024 के मध्य में नया सैन्य अभियान शुरू किया लेकिन इसमें उसे कोई खास सफलता बिल्कुल नहीं मिल पाई है।
पाकिस्तानी सेना के लिए खैबर पख्तूनख्वा से सबसे बड़ा और बहुत ही गंभीर खतरा सामने आ रहा है। साल 2021 में अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से टीटीपी ने पाकिस्तान में अपने हमले काफी ज्यादा तेज कर दिए हैं। उसके लगभग 6,000 खतरनाक लड़ाके उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में अपना इस्लामिक शासन पूरी तरह से स्थापित करना चाहते हैं। टीटीपी के लगातार बढ़ते हमलों के कारण खैबर पख्तूनख्वा में हिंसा पिछले 10 से ज्यादा सालों के अपने उच्चतम स्तर पर है।
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अफगानिस्तान के साथ भयंकर तनाव
साल 2016 में टीटीपी के 93 हमले हुए थे जो 2025 में बहुत तेजी से बढ़कर 545 के डरावने आंकड़े तक पहुंच गए हैं। इस साल अकेले ही यह खतरनाक हमले अब तक 198 की भारी और बहुत बड़ी संख्या तक आसानी से पहुंच चुके हैं। पाकिस्तान बार-बार अफगान तालिबान पर टीटीपी लड़ाकों को सुरक्षित पनाह देने का बहुत ही गंभीर आरोप लगाता रहा है। इन गंभीर विवादों के कारण फरवरी में इस्लामाबाद ने अफगानिस्तान के खिलाफ एक खुली जंग का बहुत बड़ा ऐलान कर दिया था।
