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अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी हवाई हमले की एमनेस्टी इंटरनेशनल ने की निंदा, निष्पक्ष जांच की मांग
Afghanistan Civilian Casualties: एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हवाई हमलों की निंदा की है, जिसमें महिलाओं और बच्चों सहित 13 नागरिक मारे गए और इसकी स्वतंत्र जांच की मांग की है।
- Written By: प्रिया सिंह

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हवाई हमलों की स्वतंत्र जांच की मांग की (सौ. सोशल मीडिया)
International Law Humanitarian Responsibility: एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। मानवाधिकार संगठन ने इन हमलों में नागरिकों के हताहत होने की खबरों पर गहरी चिंता जताते हुए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। अंतर्राष्ट्रीय कानून मानवीय जिम्मेदारी के तहत संगठन ने सभी पक्षों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानून का पालन करने का आग्रह किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब काबुल और इस्लामाबाद के बीच सीमा पर तनाव और सैन्य झड़पें लगातार तेज होती जा रही हैं।
हमले का विवरण
संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) ने रिपोर्ट दी है कि 21 और 22 फरवरी की रात को पाकिस्तान ने नंगरहार के कई जिलों में हमले किए। इन हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 13 निर्दोष लोगों की जान चली गई और सात अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। खामा प्रेस के अनुसार हमलों का सिलसिला दोपहर तक जारी रहा जिसमें बरमल जिले के एक स्कूल और एक मस्जिद को भी निशाना बनाया गया।
रिहायशी इलाकों पर हमला
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था ने जानबूझकर विभिन्न प्रांतों के रिहायशी इलाकों में घातक हमले किए हैं। मंत्रालय के अनुसार पक्तिका के ओरगुन जिले में एक घर तबाह हो गया और पक्तिका के बरमल में एक मदरसे को भी निशाना बनाया गया। अफगान सरकार का मानना है कि नागरिक आबादी और धार्मिक संस्थानों पर हमले पाकिस्तान सेना की खुफिया और सुरक्षा विफलताओं का प्रमाण हैं।
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संप्रभुता का उल्लंघन
अफगान रक्षा मंत्रालय ने इन हमलों को अफगानिस्तान की राष्ट्रीय संप्रभुता का खुला उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पूरी तरह अपमान बताया है। काबुल ने इसे पाकिस्तान की बार-बार की जाने वाली आक्रामक कार्रवाई करार दिया है जो अच्छे पड़ोसी सिद्धांतों और इस्लामी मूल्यों के खिलाफ है। अफगानिस्तान ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि वह इन घातक हमलों का उचित समय पर उपयुक्त और संतुलित तरीके से जवाब देने के लिए तैयार है।
अतीत का संदर्भ
यह पहली बार नहीं है जब आम नागरिकों को सैन्य ताकत के इस्तेमाल का खामियाजा भुगतना पड़ा है क्योंकि इससे पहले भी सीमा पर झड़पें हुई हैं। दिसंबर 2025 के बीच भी सीमा पर हुई सैन्य झड़पों में 70 नागरिकों की मौत हुई थी और 478 लोग घायल होने की रिपोर्ट सामने आई थी। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपील की है कि युद्ध के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का पालन करना सभी पक्षों की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी है।
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वैश्विक चिंताएं
एमनेस्टी इंटरनेशनल और संयुक्त राष्ट्र दोनों ने ही पाकिस्तान से मांग की है कि वह अपनी सैन्य आक्रामकता को तुरंत रोके और नागरिकों को बचाए। स्वतंत्र जांच की मांग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से नागरिकों और बच्चों को होने वाले नुकसान को टाला जा सके。 वैश्विक समुदाय अब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते इस टकराव पर नजर बनाए हुए है क्योंकि इससे संप्रभुता और शांति को बड़ा खतरा है।
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