

Bashir Badr Funeral: भोपाल में मशहूर शायर और पद्मश्री सम्मानित बशीर बद्र के निधन के बाद सोशल मीडिया पर उनके जनाजे में शामिल लोगों की संख्या को लेकर बहस छिड़ गई है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि उनकी अंतिम यात्रा में महज 20 से 40 लोग शामिल हुए, जबकि कई लोगों ने इन दावों को भ्रामक बताते हुए कहा कि जनाजे में सैकड़ों लोगों ने पहुंचकर उन्हें अंतिम विदाई दी।
बशीर बद्र के निधन के बाद फेसबुक, एक्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई पोस्ट वायरल हो रही हैं। कुछ पोस्ट में कहा गया कि जिस शायर के शेर दशकों से लोगों की जुबान पर हैं, उनके जनाजे में बेहद कम लोग पहुंचे। इन पोस्टों में भोपाल के साहित्यिक, सामाजिक और राजनीतिक वर्ग की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए गए।
कर्मचारी नेता सुधीर नायक ने फेसबुक पर लिखा एक टाइम था जब बशीर बद्र को सुनने के लिए भीड़ उमड़ती थी। वाह वाह इरशाद और तालियों की गड़गड़ाहट फूलों के हार। यह दौर थोड़ा बहुत नहीं पूरे 40 साल तक चला, लेकिन जब आखिरी सफर आया तो 40 आदमी भी नहीं थे।
वहीं वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने सोशल मीडिया पर इन दावों का खंडन करते हुए लिखा तथ्य तो यही है। अभी भोपाल की आत्मा मरी नहीं है। सैकड़ों लोग बशीर साब को अंतिम विदाई देने गए थे। यदि दीवाली के दिन कोई ऊपर चला जाए तो लोग घर की पूजा नहीं छोड़ते। उस दिन तो ईद थी ।
सोशल मीडिया पर कुछ अन्य लोगों ने भी तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि जनाजे में 250 से अधिक लोग मौजूद थे। दूसरी ओर कुछ पोस्टों में यह भी कहा गया कि लंबे समय से बीमारी और डिमेंशिया से जूझ रहे बशीर बद्र सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए थे, जिसके कारण उनके संपर्क सीमित हो गए थे।
इस बीच कई यूजर्स ने बशीर बद्र के मशहूर शेर साझा करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। वहीं कुछ पोस्टों में सरकार, जनप्रतिनिधियों और साहित्यिक जगत के लोगों की अनुपस्थिति को लेकर सवाल भी उठाए गए।
हालांकि जनाजे में शामिल लोगों की वास्तविक संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, लेकिन इस बात पर लगभग सभी सहमत नजर आए कि बशीर बद्र उर्दू शायरी की दुनिया का एक बड़ा नाम थे, जिनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों तक याद रखी जाएंगी।