‘अमीर हुक्म देते हैं, फतवे नहीं…’ तालिबान ने पाकिस्तान को दिया करारा जवाब, शुरू होगी जंग?
Taliban Fatwa News: इस्तांबुल में पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच चली अहम वार्ता फिर बेनतीजा रही। पाकिस्तान चाहता था कि अफगान तालिबान अपने सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा से पाकिस्तान में जारी...
- Written By: अमन उपाध्याय
तालिबान ने पाकिस्तान टेंशन, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Pakistan Afghanistan War: तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच हुई वार्ता एक बार फिर बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। इस बैठक का मकसद दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव को कम करना था लेकिन इस बार विवाद का केंद्र कोई राजनीतिक या सीमाई मसला नहीं, बल्कि धार्मिक आदेश यानी ‘फतवा’ था।
पाकिस्तान ने वार्ता में अफगान तालिबान से यह आग्रह किया कि उनके सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा यह ऐलान करें कि पाकिस्तान में जारी सशस्त्र संघर्ष इस्लाम के खिलाफ है। यानी, पाकिस्तान चाहता था कि अफगान तालिबान खुले तौर पर पाकिस्तान के खिलाफ लड़ रही तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की जंग को “गैर-इस्लामी” घोषित करें।
अमीर हुक्म देते हैं, फतवे नहीं
लेकिन अफगान तालिबान ने यह मांग सख्ती से ठुकरा दी। अफगान सरकार में उप गृह मंत्री और तालिबान वार्ता दल के प्रमुख रहमतुल्लाह नजीब ने स्पष्ट किया कि “अमीर हुक्म देते हैं, फतवे नहीं। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान को किसी धार्मिक राय की जरूरत है तो उसे दारुल इफ्ता (फतवा जारी करने वाली संस्था) में औपचारिक आवेदन करना होगा।
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नजीब ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को अपने पक्ष में फतवा मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए क्योंकि शरीयत जो कहेगी, वही होगा। उन्होंने जोड़ा कि अफगान तालिबान किसी ऐसी लड़ाई पर फतवा नहीं दे सकता जो अफगानिस्तान की सीमाओं से बाहर लड़ी जा रही हो।
क्या है तालिबान की शर्तें?
अफगान तालिबान ने पाकिस्तान के सामने दो शर्तें रखीं —
- पाकिस्तान अपने इलाके में मौजूद ISIS (इस्लामिक स्टेट) के ठिकानों को नष्ट करे और उसके नेताओं को गिरफ्तार करे।
- पाकिस्तानी सेना अफगान सीमा क्षेत्र में हवाई उल्लंघन करना बंद करे।
- नजीब के अनुसार, इन मांगों पर कोई प्रगति नहीं हुई क्योंकि पाकिस्तान अपनी अव्यावहारिक शर्तों पर अड़ा रहा।
पाकिस्तान की मांग
दूसरी तरफ, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि उनका इस्तांबुल दौरा TTP के खिलाफ ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए था। पाकिस्तान चाहता है कि अफगान तालिबान TTP को आतंकी संगठन घोषित करे और उसके सदस्यों को अफगान सरजमीं से बाहर निकाले।
मगर तालिबान ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि अफगानिस्तान में कोई विदेशी आतंकी समूह मौजूद नहीं है। साथ ही, उन्होंने TTP को आतंकी घोषित करने से साफ इनकार कर दिया।
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इस तरह एक बार फिर यह वार्ता नतीजे तक नहीं पहुंच पाई। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक दोनों पक्ष एक-दूसरे की धार्मिक और सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से नहीं लेंगे, तब तक इस विवाद का समाधान मुश्किल है।
