ट्रंप की दूसरी पारी के एक साल पूरे...टैरिफ से लेकर वेनेजुएला पर हमले तक, 10 पांइटस में देखें रिपोर्ट कार्ड

Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और दुनिया दोनों में राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक उथल-पुथल हुई, टारगैरियन-जैसी शैली और विवादित निर्णयों ने वैश्विक स्थिरता को चुनौती दी।
Trumps first year back in office
डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Trumps first year back in office: 20 जनवरी 2025 को डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में दूसरी बार राष्ट्रपति पद संभाला। उनकी राजनीतिक शैली और निर्णय लेने का तरीका कई मामलों में टारगैरियन राजाओं की तरह देखा गया, जिनके बारे में सेर बैरिस्टन सेल्मी ने कहा था कि उन्हें आने वाले राजा की आदतें पहले से ही समझ में आ जाती हैं। 

ट्रंप ने पहले ही दिन से यह दिखाना शुरू कर दिया कि उनके फैसले किसी भी अनुमान से बाहर होंगे। अगले एक साल में उनके द्वारा लिए गए निर्णयों ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और अमेरिका के अंदर ही राजनीति को झकझोर दिया। आइए ट्रंप के दूसरी पारी के एक साल पूरे होने के मौके पर हम आपको उनके द्वारा किए गए 10 बड़े फैसलों के बारे में बताते है जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया।

वेनेजुएला पर सैन्य अभियान

3 जनवरी 2026 को अमेरिका ने “ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व” के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया। अमेरिका ने उन्हें ड्रग्स तस्करी और संबंधित मामलों में आरोपों का सामना करने के लिए अपने यहां लाया। ट्रंप ने इस अभियान के बाद स्पष्ट कर दिया कि वे वेनेजुएला के तेल और संसाधनों पर नियंत्रण अमेरिकी हाथों में चाहेंगे। यह कदम 21वीं सदी में किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए आश्चर्यजनक और विवादास्पद था।

ग्रीनलैंड पर कब्जे की योजना

ट्रंप ने डेनमार्क के अर्धस्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को कब्जाने की इच्छा जताई। उनका कहना था कि यह कदम रूस और चीन को रोकने के लिए जरूरी है। हालांकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने साफ कहा कि यह जमीन बिकाऊ नहीं है, ट्रंप ने अपने नाटो सहयोगियों पर टैरिफ लगाने की धमकी भी दी। अमेरिका के इस कदम से ग्रीनलैंड में तनाव बढ़ गया और वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ी।

यूक्रेन-रूस संघर्ष

ट्रंप ने चुनावी वादे के मुताबिक रूस-यूक्रेन युद्ध को 24 घंटे में खत्म करने का दावा किया था, लेकिन एक साल में न तो युद्ध रुका और न ही ट्रंप की कोई स्थिर नीति दिखाई दी। उन्होंने कभी यूक्रेनी राष्ट्रपति को सार्वजनिक रूप से बेइज्जत किया तो कभी रूस को युद्ध की जिम्मेदारी ठहराया। इस बीच, यूक्रेन में अमेरिकी हथियारों की बिक्री जारी रही।

गाजा पर बार-बार बदला रुख

फरवरी 2025 में ट्रंप ने अमेरिका द्वारा गाजा पर कब्जे की धमकी दी। इस प्रस्ताव की संयुक्त राष्ट्र ने निंदा की और इसे “जातीय सफाए” से जोड़कर देखा। अक्टूबर तक ट्रंप ने धीरे-धीरे पीछे हटते हुए गाजा में एक कमजोर संघर्षविराम और “बोर्ड ऑफ पीस” योजना पेश की, जिसका नेतृत्व स्वयं ट्रंप करना चाहते थे। इस बोर्ड में स्थायी सदस्य बनने के लिए देशों से 1 बिलियन डॉलर की मांग की जा रही है।

सात देशों पर सैन्य कार्रवाई

ट्रंप ने ईरान, इराक, नाइजीरिया, सोमालिया, सीरिया, वेनेजुएला और यमन में सैन्य हमले किए। कार्यकाल के पहले पांच महीनों में 529 हवाई हमले दर्ज किए गए, जिनमें ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमले शामिल थे। उनका यह दृष्टिकोण “बम फर्स्ट” के सिद्धांत पर आधारित दिखाई दिया।

“शांतिदूत” बनने का दावा

ट्रंप ने खुद को शांति का संरक्षक दिखाने का प्रयास किया। उन्होंने भारत-पाकिस्तान संघर्ष और अन्य वैश्विक जटिल मुद्दों पर हस्तक्षेप करने का दावा किया। शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए भी उन्होंने प्रयास किया, लेकिन असली विजेता वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो बनी।

टैरिफ को बनाया हथियार

ट्रंप ने विदेश नीति में टैरिफ को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने भारत से आयात पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया और यूरोप के सहयोगियों पर भी 25% टैरिफ की धमकी दी। उनका यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला देने वाला साबित हुआ।

अंतर्राष्ट्रीय समझौतों से बाहर निकलना

“अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत ट्रंप ने अमेरिका को पेरिस समझौते और विश्व स्वास्थ्य संगठन से बाहर कर दिया। उन्होंने नाटो सहयोगियों को चेतावनी दी कि अगर वे खर्च लक्ष्यों को पूरा नहीं करेंगे तो अमेरिका आर्टिकल 5 के तहत रक्षा प्रतिबद्धताओं का सम्मान नहीं करेगा। USAID समेत अमेरिकी वैश्विक फंडिंग में भी भारी कटौती की गई।

न्यूक्लियर टेस्ट की धमकी

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रूस, चीन और पाकिस्तान न्यूक्लियर परीक्षण कर रहे हैं और अब अमेरिका भी ऐसा करेगा। उन्होंने 1992 के बाद पहले न्यूक्लियर ब्लास्ट की संभावना जताई, जिससे वैश्विक सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हुआ।

अमेरिका के अंदर उथल-पुथल

ट्रंप ने संघीय DEI (diversity, equity, inclusion) कार्यक्रमों को खत्म किया और सरकारी नौकरियों में केवल योग्यता पर ध्यान देने का आदेश दिया। जन्म के समय का लिंग ही सरकारी दस्तावेजों में मान्य होगा। उन्होंने प्रवासन नीतियों को कठोर बनाया और अमेरिकी सड़कों पर अवैध प्रवास के लिए सैनिकों को उतारा। विश्वविद्यालयों में “वामपंथी और यहूदी-विरोधी विचारधारा” के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी और विदेशी छात्रों के वीजा नियम सख्त किए। साथ ही FDA और अन्य स्वास्थ्य निगरानी एजेंसियों में भारी कटौती की गई।

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