पाक में अलग प्रांत की मांग हुई तेज, MQM-P ने सिंध सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा; कराची-हैदराबाद में हजारों जुटे

New Province Demand Sindh: पाकिस्तान की पार्टी MQM-P ने प्रशासनिक और भाषाई आधार पर सिंध से अलग नए प्रांत की मांग तेज कर दी है। पार्टी ने कराची के साथ बजट आवंटन में भारी भेदभाव का आरोप लगाया है।
Demand for a separate province intensifies in Pakistan; MQM-P launches a campaign against the Sindh government; thousands gather in Karachi and Hyderabad.
पाकिस्तान के हैदराबाद में MQM की रैली, फोटो (सो. IANS)
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New Province Demand Sindh Pakistan: पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर नए प्रांतों के गठन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान (MQM-P) ने सिंध सहित पूरे देश में प्रशासनिक आधार पर नए प्रांत बनाने की अपनी मांग को लेकर एक बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है।

शनिवार को पार्टी ने हैदराबाद में एक विशाल रैली के जरिए अपनी ताकत दिखाई, वहीं कराची में वरिष्ठ नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सिंध सरकार पर संसाधनों की लूट का गंभीर आरोप लगाया।

हैदराबाद में उमड़ा जनसैलाब

हैदराबाद में पार्टी अध्यक्ष खालिद मकबूल सिद्दीकी के नेतृत्व में आयोजित रैली में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। रैली को संबोधित करते हुए सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि पार्टी ने सिंध से अलग नया प्रांत बनाने की अपनी पुरानी मांग को कभी नहीं छोड़ा है।

उन्होंने कहा कि नए प्रांत का गठन मातृभाषा और भूमि के आदान-प्रदान" के सिद्धांतों के आधार पर होना चाहिए। सिद्दीकी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि भारत से आए मुहाजिर लियाकत-नेहरू समझौते के तहत अपनी मर्जी से पाकिस्तान आए थे।

बजट को लेकर भेदभाव के आरोप

MQM-P ने सिंध सरकार पर आर्थिक भेदभाव के तीखे प्रहार किए। सिद्दीकी ने दावा किया कि सिंध के कुल बजट का 97 प्रतिशत हिस्सा अकेले कराची, हैदराबाद और मीरपुर खास जैसे शहरी इलाकों से आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रांत में एक वर्ग ऐसा है जो 100 प्रतिशत टैक्स देकर पूरे सिंध का बोझ उठा रहा है, जबकि दूसरा वर्ग बिना किसी योगदान के उन संसाधनों का लाभ ले रहा है।

कराची की अनदेखी का आंकड़ा

कराची में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संघीय स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। कमाल ने बताया कि पिछले 18 वर्षों के दौरान सिंध सरकार को कुल 22 ट्रिलियन रुपये का फंड मिला, लेकिन इसमें से कराची को महज 680 अरब रुपये ही आवंटित किए गए।

उन्होंने तर्क दिया कि यदि 2010 से पहले वाला जीएसटी बंटवारा फॉर्मूला लागू रहता, तो कराची को कम से कम 2 ट्रिलियन रुपये मिलते, जिससे शहर में पानी, अस्पताल और शिक्षा की स्थिति बेहतर हो सकती थी।

संवैधानिक टकराव के संकेत

मुस्तफा कमाल ने आरोप लगाया कि 18वें संशोधन के बाद ++ने सभी शक्तियां अपने पास केंद्रित कर ली हैं और स्थानीय निकायों को पंगु बना दिया है। उन्होंने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) पर निशाना साधते हुए कहा कि बहुमत के अहंकार में संवैधानिक संशोधनों को पारित नहीं होने दिया जा रहा है।

पार्टी ने अब इस लड़ाई को सड़कों पर ले जाने का फैसला किया है। इसी कड़ी में रविवार को कराची के शाह फैसल टाउन में एक और बड़ी विरोध रैली का आह्वान किया गया है, जिसमें जनता से अपने अधिकारों के लिए शामिल होने की अपील की गई है।

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