जम्मू-कश्मीर में विकास का नया सवेरा, बदहाली की मार झेल रहा पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर
Jammu Kashmir Development: अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में रिकॉर्ड 2.3 करोड़ पर्यटक पहुंचे और आतंकवाद में भारी कमी आई, जबकि POJK आज महंगाई और दमन के कारण एक राजनीतिक ब्लैक होल बन चुका है।
- Written By: प्रिया सिंह
जम्मू-कश्मीर (सोर्स-सोशल मीडिया)
Article 370 Removal Impact J&K: जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के असर के बाद विकास की एक ऐसी लहर आई है जिसने पिछले सत्तर वर्षों के पाकिस्तानी दुष्प्रचार को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। भारत सरकार द्वारा तैयार किया गया विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा और समावेशी शासन आज श्रीनगर से लेकर जम्मू तक की तस्वीर को पूरी तरह से बदल रहा है। इसके विपरीत नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले इलाके आज भारी महंगाई, आर्थिक शोषण और राजनीतिक जड़ता के गंभीर संकट में फंसे हुए हैं।
नया कश्मीर और विकास
वर्ष 2019 का फैसला केवल एक कानूनी बदलाव नहीं था बल्कि उस दीवार को गिराना था जिसने कश्मीरियों को भारतीय प्रगति की धड़कन से अलग रखा था। आज श्रीनगर के चहल-पहल भरे बाजारों और जम्मू के औद्योगिक केंद्रों में एक आर्थिक पुनर्जागरण की कहानी साफ तौर पर हर जगह महसूस की जा सकती है। वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ते हुए जम्मू-कश्मीर अब अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की सफलतापूर्वक मेजबानी कर रहा है और यहां एक विश्वस्तरीय स्वास्थ्य व्यवस्था भी खड़ी हो रही है।
मतपत्र की बड़ी ताकत
साल 2024 के विधानसभा चुनावों में हुआ 63 प्रतिशत का भारी मतदान इस बात का प्रमाण है कि जनता ने बंदूक के बजाय लोकतंत्र के मतपत्र को चुना है। दशकों तक मतदान के अधिकार से वंचित रहे पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी और हाशिए पर रहे समुदायों ने पहली बार समान नागरिक के रूप में हिस्सा लिया। इस ऐतिहासिक भागीदारी ने सीमा पार से प्रायोजित उस नैरेटिव का सार्वजनिक अंत कर दिया है जिसमें कहा जाता था कि कश्मीरी भारतीय लोकतंत्र को खारिज करते हैं।
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आतंकवाद पर कड़ा प्रहार
अनुच्छेद 370 हटने के बाद सबसे बड़ी सफलता स्थानीय उग्रवाद में आई तेज गिरावट और साप्ताहिक रूप से होने वाली पत्थरबाजी की घटनाओं का शून्य होना है। हालांकि हाइब्रिड आतंकी अप्रैल 2025 जैसी हताश कोशिशें कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय युवाओं की आतंकी गुटों में भर्ती अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। सीमा पार से होने वाली फंडिंग बंद होने के कारण अब घाटी के दूरदराज के गांवों में भी लोग विदेशी घुसपैठियों की पहचान में सुरक्षा बलों की मदद करते हैं।
पर्यटन और स्टार्टअप की लहर
शांति के इस नए दौर का सुखद परिणाम यह रहा कि साल 2024 में जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों की कुल संख्या 2.3 करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े के पार पहुंच गई। घाटी के युवा अब कट्टरपंथी एजेंडे को पूरी तरह नकार चुके हैं और स्टार्टअप इनक्यूबेटर के माध्यम से भविष्य की आर्थिक चुनौतियों के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। जम्मू के औद्योगिक क्षेत्र अब केवल निर्माण के केंद्र नहीं हैं बल्कि वे उस नए कश्मीर की पहचान हैं जो प्रगति की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए बेताब है।
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POJK का अंधेरा सच
जहां भारतीय कश्मीर वैश्विक पटल पर चमक रहा है, वहीं पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (POJK) एक “राजनीतिक ब्लैक होल” के रूप में अपनी पहचान खो रहा है। वहां पाकिस्तान के अवैध विलय पर सवाल उठाने वाले नागरिकों को दंडित किया जाता है और पूरा क्षेत्र आज केवल शोषण और बढ़ते असंतोष का केंद्र बनकर रह गया है। POJK की गिरती अर्थव्यवस्था और वहां के लोगों का दमन साफ दिखाता है कि पाकिस्तान किस तरह इस क्षेत्र को केवल अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करता है।
