ओली की पार्टी का बड़ा वार! सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम सरकार को भेजा नोटिस, संसद बहाली पर भी सवाल
Nepal News Hindi: नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने केपी शर्मा ओली की पार्टी CPN-UML द्वारा दायर याचिका पर अंतरिम सरकार के गठन और सदन के विघटन को चुनौती देते हुए नोटिस जारी किया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
केपी शर्मा ओली, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Nepal Interim Government Notice: नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (03 दिसंबर 2025) को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम में अपदस्थ प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की पार्टी CPN-UML द्वारा दायर याचिका के संबंध में अंतरिम सरकार को नोटिस जारी किया है। यह याचिका अंतरिम सरकार के गठन और प्रतिनिधि सभा को भंग करने के निर्णय को चुनौती देती है, जिसमें इन फैसलों को ‘अवैध’ करार दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ ने इस मामले में सभी प्रतिवादियों को अटॉर्नी जनरल के कार्यालय के माध्यम से सात दिनों के अंदर अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस पीठ का नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश प्रकाशमान सिंह राउत कर रहे थे पीठ ने यह भी आदेश दिया कि इस नई याचिका पर सुनवाई सदन को भंग करने और अंतरिम सरकार के गठन से संबंधित पहले से लंबित मामलों के साथ की जाएगी।
अंतरिम सरकार के गठन पर गंभीर आरोप
याचिका में विशेष रूप से पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त करने के फैसले पर सवाल उठाया गया है। सीपीएन-यूएमएल ने दावा किया है कि कार्की की नियुक्ति संविधान का सीधा उल्लंघन है। याचिका के अनुसार, यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 76 और 132(2) का उल्लंघन करती है। तर्क दिया गया है कि सुशीला कार्की न तो संसद की सदस्य हैं और न ही पूर्व मुख्य न्यायाधीश के तौर पर उन्हें यह पद स्वीकार करने का अधिकार है।
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संसद को बहाल करने की मांग
CPN-UML ने अपनी याचिका में राष्ट्रपति द्वारा कार्की को प्रधानमंत्री नियुक्त करने के फैसले को रद्द करने (cancel) की मांग की है, साथ ही कैबिनेट की नियुक्तियों और उसके बाद के सभी निर्णयों को भी रद्द करने की मांग की गई है। इसके अलावा, पार्टी ने सदन भंग करने के आदेश को वापस लेने और संसद को बहाल करने की मांग की है।
संसद भंग होने का घटनाक्रम
आपको बता दें कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को 12 सितंबर को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था। उनकी सिफ़ारिश पर, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संसद को भंग कर दिया था। संसद भंग करने के साथ ही, राष्ट्रपति ने यह ऐलान भी किया था कि देश में आगामी आम चुनाव 5 मार्च, 2026 को आयोजित किए जाएंगे।
बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन
संसद भंग करने की पृष्ठभूमि में राजनीतिक अस्थिरता थी। दरअसल, प्रधानमंत्री ओली को 9 सितंबर को पद से हटाए जाने के बाद चुनाव कराना आवश्यक हो गया था। यह घटनाक्रम तब हुआ जब देश में Gen Z द्वारा बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन किए गए। ये विरोध प्रदर्शन भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध हटाने की मांग को लेकर किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप दो दिनों में 76 लोगों की मौत हो गई थी।
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ओली की पार्टी CPN-UML द्वारा दायर इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस यह दर्शाता है कि नेपाल में अंतरिम सरकार की वैधता और संवैधानिक प्रक्रियाएं अभी भी गहन कानूनी जांच के दायरे में हैं और राजनीतिक संकट जारी है।
