अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच चीन की बड़ी चाल! ताइवान के चारों ओर भेजा फाइटर जेट, एशिया-प्रशांत में बढ़ा तनाव
China Taiwan Tension: दुनिया का ध्यान इस समय अमेरिका-ईरान तनाव पर है इसी बीच चीन ने ताइवान के पास 26 लड़ाकू विमान और 7 युद्धपोत तैनात कर 'ग्रे-जोन वॉरफेयर' तेज कर दिया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
चीन ने ताइवान के चारों ओर भेजा फाइटर जेट और वॉरशिप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
China Deploys Jets Warships Near Taiwan: वैश्विक राजनीति में इस समय शक्ति संतुलन के कई मोर्चों पर एक साथ दबाव बनता दिखाई दे रहा है। एक तरफ जहां अमेरिका पश्चिम एशिया के संकट और ईरान के साथ बढ़ते टकराव में उलझा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ चीन ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ताइवान के खिलाफ अपनी सैन्य गतिविधियों को अचानक तेज कर दिया है।
ताइवान की घेराबंदी
ताइवान के रक्षा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, चीन ने हाल ही में ताइवान के चारों ओर 26 सैन्य विमान और 7 नौसैनिक युद्धपोत तैनात किए हैं। इनमें से 16 विमान ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) में दाखिल हुए, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। जवाब में ताइवान ने भी अपनी सतर्कता बढ़ा दी है और निगरानी के लिए अपने लड़ाकू विमानों, नौसेना के जहाजों और मिसाइल सिस्टम को सक्रिय कर दिया है।
क्या है चीन की ‘ग्रे-ज़ोन वॉरफेयर’ रणनीति?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह गतिविधियां चीन की ‘ग्रे-ज़ोन वॉरफेयर’ रणनीति का हिस्सा हैं। यह एक ऐसी युद्ध पद्धति है जो युद्ध और शांति के बीच की रेखा पर चलती है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
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- सेना को थकाना: बार-बार अलर्ट और घुसपैठ के जरिए ताइवान की वायुसेना और नौसेना को लगातार सक्रिय रहने के लिए मजबूर करना, जिससे उनके संसाधनों और बजट पर दबाव पड़ता है।
- क्षमता परखना: चीन यह देख रहा है कि ताइवान कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देता है और उसकी सुरक्षा प्रणाली कितनी प्रभावी है।
- नई सामान्य स्थिति: नियमित सैन्य घुसपैठ के जरिए चीन इस क्षेत्र में अपनी स्थायी उपस्थिति को ‘सामान्य’ बनाना चाहता है।
रणनीतिक समय का चुनाव
विश्लेषकों के अनुसार, चीन ने इस सैन्य दबाव के लिए बहुत ही रणनीतिक समय चुना है। वर्तमान में अमेरिका एक साथ कई संकटों पश्चिम एशिया संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध और अपनी घरेलू चुनौतियों में व्यस्त है। ऐसे में चीन यह परखना चाहता है कि क्या अमेरिका एक साथ दो मोर्चों पर सक्रिय रह सकता है या नहीं। इसे विशेषज्ञों ने ‘प्रेशर टेस्टिंग’ की रणनीति करार दिया है।
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ताइवान स्ट्रेट का महत्व
ताइवान स्ट्रेट दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में से एक है। जहां चीन बल प्रयोग के जरिए भी एकीकरण की बात करता रहा है, वहीं ताइवान खुद को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक प्रशासन मानता है। इस पूरे समीकरण में अमेरिका की भूमिका महत्वपूर्ण है क्योंकि वह ताइवान को रक्षा सहायता और आधुनिक हथियार मुहैया कराता है। 2020 के बाद से इन सैन्य गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो इस क्षेत्र में एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत है।
