नेपाल में चुनाव (सोर्स- सोशल मीडिया)
2026 Nepal Elections: नेपाल में आज हो रहा आम चुनाव देश की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। चुनाव आयोग के अनुसार संसद की 165 सीटों पर होने वाले प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली यानी “फर्स्ट पास्ट द पोस्ट” के नतीजे मतपेटियां इकट्ठा होने के लगभग 24 घंटे के भीतर घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है।
वहीं आनुपातिक प्रतिनिधित्व (PR) प्रणाली के तहत तय होने वाली 110 सीटों की गिनती में दो से तीन दिन लग सकते हैं। अगर आयोग तय समयसीमा में नतीजे घोषित कर देता है, तो यह एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा, क्योंकि 2022 के आम चुनाव में अंतिम परिणाम आने में दो सप्ताह से अधिक समय लग गया था।
नेपाल प्रशासनिक रूप से सात प्रांतों कोशी, मधेश, बागमती, गंडकी, लुंबिनी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम में विभाजित है और इन सभी प्रांतों में एक साथ मतदान कराया जा रहा है। इस बार चुनावी मैदान काफी विविधतापूर्ण नजर आ रहा है, जिसमें स्थापित राजनीतिक दलों के साथ कई नए राजनीतिक समूह भी सक्रिय हैं।
प्रमुख दलों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP), नेपाली कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल–यूएमएल, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP), राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP), जनता समाजवादी पार्टी–नेपाल (PSP-N), जनमत पार्टी और यूनिफाइड नेशनल पार्टी (UNP) शामिल हैं। इसके अलावा कई छोटे दल और स्वतंत्र उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं।
चुनाव में अनुभवी नेताओं और नए उभरते चेहरों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री और यूएमएल के प्रमुख नेता केपी शर्मा ओली एक बार फिर सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं। वहीं नेपाली कांग्रेस के प्रभावशाली नेता गगन थापा भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने को अपनी चुनावी प्राथमिकता बता रहे हैं।
इसके अलावा काठमांडू के लोकप्रिय मेयर रहे बालेन शाह भी इस चुनाव के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हैं। पूर्व रैपर और सिविल इंजीनियर रहे बालेन शाह को एक सुधारवादी और युवा समर्थक नेता के रूप में देखा जाता है, और शहरी क्षेत्रों तथा युवा मतदाताओं में उनकी अच्छी लोकप्रियता है।
नेपाल में मिश्रित चुनाव प्रणाली लागू है। इसके तहत संसद की 165 सीटों पर प्रत्यक्ष चुनाव होता है, जिसमें किसी क्षेत्र में सबसे अधिक वोट पाने वाला उम्मीदवार विजेता बनता है। इसके अलावा 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत दी जाती हैं, जहां पार्टियों को मिले कुल वोट प्रतिशत के आधार पर सीटें आवंटित की जाती हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य छोटे दलों और विभिन्न सामाजिक समूहों को भी संसद में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
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यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब नेपाल पिछले एक वर्ष से राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। सितंबर 2025 में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ खासकर युवाओं और जेन-जेड के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। कई जगह इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और झड़पें भी हुईं, जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन किया गया, जिसने छह महीने के भीतर चुनाव कराने का वादा किया था।