खामेनेई की मौत के बाद बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हमला (सोर्स- सोशल मीडिया)
US Embassy Protests Baghdad Pakistan: मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदें उस समय धराशायी हो गईं जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर पूरी दुनिया में फैल गई। इस दुखद घटना के बाद इराक से लेकर पाकिस्तान तक गुस्से की आग फैल गई है और हजारों लोग न्याय की मांग करते हुए सड़कों पर उतर आए हैं। इजराइली मिसाइल हमलों ने तेहरान को निशाना बनाकर पूरे क्षेत्र को एक ऐसे युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है जहां से वापसी का रास्ता फिलहाल धुंधला नजर आ रहा है। यह एक ऐसी सुबह थी जब हर तरफ केवल डर, विरोध और अनिश्चितता का साया मंडरा रहा था जो अब वैश्विक व्यवस्था को कड़ी चुनौती दे रहा है।
रविवार की रात इराक की राजधानी बगदाद के लिए बेहद अशांत रही क्योंकि सैकड़ों प्रो-ईरानी प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी दूतावास की ओर गुस्से में कूच किया। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षित माने जाने वाले ‘ग्रीन ज़ोन’ में घुसने की पुरजोर कोशिश की और तैनात सुरक्षाबलों पर जमकर पत्थरबाजी की जिससे वहां माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। जवाब में सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले और स्टन ग्रेनेड छोड़े ताकि भीड़ को दूतावास की दीवारों से दूर रखा जा सके और वहां की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पाकिस्तान के कराची शहर में भी विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया जहां अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर बड़ी संख्या में आक्रोशित भीड़ जमा हुई। इस स्थिति को संभालने के लिए जब सुरक्षाबलों ने कड़ी कार्रवाई की तो वहां हुई गोलीबारी की घटना में कई लोगों की मौत होने की दुखद खबर सामने आई है। ईरान के बाद पाकिस्तान और इराक में शिया आबादी अधिक होने के कारण यहां अमेरिका और इजराइल के हमलों के खिलाफ सबसे ज्यादा गुस्सा और हिंसक विरोध देखा जा रहा है।
इजराइली मिसाइल हमलों में खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने भी चुप न रहने का फैसला किया और जवाबी कार्रवाई में रविवार को कई मिसाइलें दागीं। ईरान ने इजराइल के प्रमुख शहरों और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध की स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। इस सैन्य संघर्ष ने न केवल जान-माल का नुकसान किया है बल्कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग, हवाई यात्रा और तेल क्षेत्रों की गतिविधियों पर भी बहुत बुरा असर डाला है।
मध्य पूर्व में जारी इस अशांति और हिंसा का असर अब धीरे-धीरे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और प्रमुख व्यापारिक गतिविधियों पर भी साफ तौर पर दिखने लगा है। हवाई मार्ग और समुद्री व्यापार मार्ग बाधित होने से जरूरी सामानों की आपूर्ति में कमी आने का बड़ा डर पैदा हो गया है जो वैश्विक बाजार में महंगाई बढ़ा सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समय सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है ताकि इस अशांत क्षेत्र को एक बड़ी मानवीय त्रासदी और महायुद्ध से बचाया जा सके।
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इस भयावह स्थिति के बीच दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों ने दोनों पक्षों से हिंसा रोकने और बातचीत के जरिए समाधान खोजने की गुजारिश की है ताकि अमन कायम हो सके। यदि यह तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसके परिणाम पूरी मानवता के लिए विनाशकारी साबित हो सकते हैं क्योंकि सैन्य ताकतें अब आमने-सामने आ चुकी हैं। हर कोई यही प्रार्थना कर रहा है कि जल्द ही कूटनीति का रास्ता खुले और इस अशांत क्षेत्र में फिर से शांति और सामान्य जीवन की बहाली हो सके।