हिंद महासागर में चीन की नई चाल... मालदीव पहुंचा रिसर्च वेसल 'दा यांग हाओ', भारतीय नौसेना अलर्ट

China Research Vessel: चीन का अत्याधुनिक रिसर्च वेसल 'दा यांग हाओ' हिंद महासागर की ओर बढ़ रहा है। मालदीव को अपना बेस बनाने वाले इस जहाज पर भारतीय नौसेना सामरिक कारणों से कड़ी निगरानी रख रही है।
Chinese Research Vessel Da Yang Hao Heads to Indian Ocean; Indian Navy on High Alert
चीन कारिसर्च वेसल 'दा यांग हाओ' पहुंचा मालदीव, हिंद महासागर में भारतीय नौसेना अलर्ट (सोर्स-सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Chinese Research Ship India: चीन का एक बेहद आधुनिक रिसर्च वेसल 'दा यांग हाओ' एक बार फिर हिंद महासागर क्षेत्र की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इस जहाज ने मालदीव के पोर्ट लुईस को अपना प्रमुख ऑपरेशनल बेस घोषित किया है जिससे भारत की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। भारतीय नौसेना इस जहाज की हर हरकत पर पैनी नजर रखे हुए है क्योंकि चीनी अनुसंधान जहाज की मौजूदगी सामरिक रूप से संवेदनशील है। चीन इसे एक वैज्ञानिक मिशन कह रहा है लेकिन इसके सैन्य उपयोग की संभावनाओं को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता है।

जहाज की तकनीकी ताकत

दा यांग हाओ चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के तहत काम करता है और इसे विशेष रूप से गहरे समुद्री अध्ययन के लिए डिजाइन किया गया है। लगभग 98.5 मीटर लंबे इस जहाज पर 60 लोगों की एक कुशल क्रू टीम हर समय तैनात रहती है जो जटिल शोध कार्य करती है। यह जहाज अत्याधुनिक उपकरणों से लैस है जो इसे समुद्र की असीमित गहराइयों में छिपे रहस्यों को खोजने में पूरी तरह सक्षम बनाते हैं। इस जहाज की सबसे बड़ी खासियत इसमें मौजूद ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल (AUV) है जो पानी के अंदर 6,000 मीटर तक की गहराई में जा सकता है। यह एयूवी समुद्र तल की विस्तृत मैपिंग करने और वहां मौजूद खनिज संसाधनों की सटीक खोज करने के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। वैज्ञानिक डेटा के अलावा यह उपकरण जलवायु परिवर्तन से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों को भी बड़ी बारीकी से इकट्ठा करने का काम करता है।

सैन्य उपयोग का संदेह

हालांकि चीन अधिकारिक तौर पर इसे एक शांतिपूर्ण वैज्ञानिक मिशन बताता है लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसके गुप्त सैन्य उपयोग को लेकर लगातार आशंका जता रहे हैं। माना जाता है कि इस जहाज का उपयोग पनडुब्बियों की ट्रैकिंग करने और समुद्री मार्गों की निगरानी करने के लिए बड़ी आसानी से किया जा सकता है। इसके अलावा यह मिसाइल टेस्टिंग के दौरान डेटा जुटाने में भी चीनी सेना की काफी बड़ी मदद कर सकता है जो भारत के लिए चिंता का विषय है।

मालदीव बना नया बेस

दा यांग हाओ का मालदीव को अपना आधार बनाना भारत के लिए रणनीतिक रूप से एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र हमारे बेहद पास है। मालदीव हिंद महासागर के उन प्रमुख समुद्री रास्तों पर स्थित है जहां से पूरी दुनिया का लगभग 80 प्रतिशत वैश्विक व्यापार सुचारू रूप से संचालित होता है। चीन की इस बढ़ती सक्रियता को भारत अपने समुद्री सुरक्षा घेरे में एक सेंध के तौर पर देख रहा है और पूरी तरह सतर्क है।

चीन की पिछली गतिविधियां

अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच यह छठा मौका है जब किसी चीनी रिसर्च वेसल ने हिंद महासागर के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में प्रवेश किया है। इससे पहले भी दा यांग यी हाओ और शेन हाई यी हाओ जैसे कई जहाज श्रीलंका और मालदीव के बंदरगाहों का निरंतर उपयोग कर चुके हैं। चीन की यह लगातार बढ़ती मौजूदगी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वह हिंद महासागर में अपनी पकड़ को और भी ज्यादा मजबूत करना चाहता है।

भारतीय नौसेना की निगरानी

भारतीय नौसेना इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पूरी तरह से चौकस है और जहाज की गतिविधियों की पल-पल की जानकारी उच्च स्तर पर साझा कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर वैश्विक व्यापार और सुरक्षा का केंद्र है इसलिए किसी भी बाहरी देश की सैन्य हलचल पर नजर रखना अनिवार्य है। भारत अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहा है ताकि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बरकरार रहे।

Navbharat Live
navbharatlive.com