ईरान में हुई खामेनेई की मौत...तो यूपी में घोषित हो गया 40 दिन का शोक, बाराबंकी की बजाय इस जिले में छाया मातम

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के अमेठी में शिया समुदाय के लोग ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत पर दुख जताने के लिए सड़कों पर उतर आए। यहां 40 दिन का शोक भी घोषित किया गया है।
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खामेनेई की मौत पर अमेठी में शोक (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Israel-Iran War: उत्तर प्रदेश के अमेठी में शिया समुदाय के लोग ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत पर दुख जताने के लिए सड़कों पर उतर आए। शिया धर्मगुरु मौलाना जीशान हैदर अली ने समुदाय की तरफ से 40 दिन के शोक का ऑफिशियल मैसेज जारी किया। प्रदर्शन के दौरान इमोशनल सीन देखने को मिले।

इसके विरोध में लोकल लोगों ने अपनी दुकानों और रोज़ाना के कामों का पूरी तरह से बायकॉट करने का फैसला किया। समुदाय के लोगों का मानना ​​है कि अमेरिका और इजरायल ने पीछे से खामेनेई पर हमला किया। इस घटना के बाद पूरे जिले के शिया बहुल इलाकों में माहौल गमगीन और तनावपूर्ण बना हुआ है।

सिया समुदाय में जबरदस्त आक्रोश

इस घटना को लेकर अमेठी में शिया समुदाय में जबरदस्त गुस्सा है। मौलाना जीशान हैदर अली ने कहा कि अयातुल्ला खामेनेई की शहादत से पूरा समुदाय दुखी है। अपनी संवेदना जताने के लिए अगले 40 दिनों तक कोई जश्न नहीं मनाया जाएगा।

स्थानीय लोगों ने की हमले की निंदा

लोकल निवासी वकार अली ज़ैदी के मुताबिक, जुल्मी सरकारें सभी को डराना चाहती हैं, लेकिन यह शहादत बेकार नहीं जाएगी। लोगों ने अपनी मर्ज़ी से अपनी दुकानें बंद रखीं और आज काम पर नहीं गए ताकि अपना विरोध जता सकें। धार्मिक नेताओं और स्थानीय लोगों ने US और इजरायल की कड़ी निंदा की।

क्या कुछ बोले मौलाना जीशान?

मौलाना जीशान ने कहा कि इन देशों ने हमेशा पीछे से हमला किया है। ऐतिहासिक संदर्भ का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 1900 सालों से जब भी कोई न्याय के लिए खड़ा हुआ, उसका खून बहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भले ही खामेनेई शहीद हो गए हों, लेकिन उनके विचार कभी खत्म नहीं होंगे। उनका मानना ​​है कि यह हमला सिर्फ एक नेता पर नहीं, बल्कि एक विचारधारा पर था।

मौलाना ने अपना संकल्प दोहराया कि जब तक ईरान का एक भी बच्चा ज़िंदा है, वे पीछे नहीं हटेंगे और अपने अस्तित्व की रक्षा करते रहेंगे। समुदाय के युवाओं का कहना है कि वे सच्चाई और न्याय की इस लड़ाई में एकजुट हैं। जिले की संवेदनशीलता को देखते हुए, प्रशासन शांति बनाए रखने के लिए स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है।

बाराबंकी से है खामेनेई का ताल्लुक

यह बाराबंकी के सिरौली गौसपुर तहसील में स्थित किंतूर गांव में साफ दिखता है। इस गांव में खामेनेई के पूर्वजों की जड़ें इसकी शांति की वजह से हैं। उनके दादा सैयद अहमद मुसावी हिंदी, 19वीं सदी की शुरुआत तक इसी गांव में रहे और बाद में ईरान चले गए।

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